भारत के थॉमस कप जीतने पर इंदौर और धार में जश्न मनाया गया।
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भूपेंद्र राजावत का कहना है कि प्रियांशु साढ़े छह साल का था, तब मध्य प्रदेश सरकार की ग्वालियर स्थित अकादमी में चला गया था। शुरुआती एक साल तो उसकी याद आती थी और आंखों में आंसू आ जाते थे। चिंता भी होती थी। हमने उससे कहा था कि कहीं भी जाए तो टैक्सी ड्राइवर और गाड़ी का फोटो खींचकर भेजा करो। रास्तेभर बातें करते रहते थे। तीन साल बाद वह हैदराबाद स्थित गोपीचंद अकादमी चला गया था।
भूपेंद्र का कहना है कि प्रियांशु को आगे बढ़ाने में मां प्रेरणा का बड़ा योगदान है। वह खुद भी फुटबाल खिलाड़ी रही हैं। हमें खुशी है कि हमारे त्याग का मीठा फल हमें मिला। प्रियांशु के पिता ने कहा कि हमें गर्व है कि देश के लिए खेलने वाली टीम में बेटा भी शामिल है। कड़ी मेहनत के दम पर उसने यह मुकाम हासिल किया है। कोर्ट में पसीना बहाने में प्रियांशु कभी कमी नहीं रखता है।