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Chaitra Navratri: शक्तिशाली राजसत्ता की देवी मां पीतांबरा, चीन-पाकिस्तान युद्ध में जीत के लिए यहीं हुआ था यज्ञ

Sun, 22 Mar 2026 06:00 AM IST
दतिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दतिया

सार

दतिया स्थित पीतांबरा पीठ शक्तिशाली शक्ति पीठ है, जहां मां बगलामुखी की पूजा होती है। मान्यता है कि युद्धों के समय यहां यज्ञ हुए। नेता, अधिकारी व हस्तियां यहां आते हैं। यहां धूमावती देवी का देश का एकमात्र मंदिर भी स्थित है।
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मां पीतांबरा पीठ को राजसत्ता की देवी भी कहा जाता है। - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित मां पीतांबरा पीठ... जो देश में सबसे शाक्तिशाली पीठों में से एक है। जहां राजाशाही से लेकर, नौकरशाह देवी की आरधाना करने के लिए सात समंदर पार तक से आते हैं। 

पीतांबरा शक्तिपीठ में मां बगलामुखी का रूप रक्षात्मक है और इन्हें राजसत्ता की देवी माना जाता है। इसी रूप में भक्त उनकी आराधना करते हैं। राजसत्ता से जुड़े नेता यहां आकर गुप्त रूप से पूजा करते हैं। पीतांबरा पीठ की शक्ति का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि 1962 में चीन ने जब भारत पर हमला किया तो दूसरे देशों ने सहयोग देने से मना कर दिया। उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को किसी ने दतिया के पीतांबरा पीठ में यज्ञ करने की सलाह दी। उस समय पंडित नेहरू दतिया आए और स्वामी ने देश के लिए मंदिर में यज्ञ किया। देश की रक्षा के लिए पीतांबरा पीठ में 51 कुंडीय महायज्ञ कराया गया और इसमें कई अफसरों और फौजियों ने आहुति डाली। 11वें दिन अंतिम आहुति डालते ही चीन ने बॉर्डर से अपनी सेनाएं वापस बुला लीं। उस समय बनाई गई यज्ञशाला पीठ में आज भी मौजूद है। उसके बाद जब भी देश के ऊपर संकट आया है, तब गोपनीय रूप में पीतांबरा पीठ में साधना व यज्ञ का आयोजन होता है। केवल भारत-चीन युद्ध ही नहीं, बल्कि 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान भी दतिया के शक्तिपीठ में विशेष अनुष्ठान किया गया। कारगिल युद्ध के समय भी अटल बिहारी वाजपेयी की ओर पीठ में एक यज्ञ का आयोजन किया गया और आहुति के अंतिम दिन पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा।

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दतिया स्थित मां पीतांबरा पीठ का मंदिर - फोटो : अमर उजाला
नामचीन हस्तियां पहुंचती हैं
मां पीतांबरा को राजसत्ता की देवी माना जाता है। इसी रूप में भक्त उनकी आराधना करते हैं। राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त यहां आकर गुप्त पूजा अर्चना करते हैं। मां पीतांबरा शत्रु नाश की अधिष्ठात्री देवी हैं और राजसत्ता प्राप्ति में मां की पूजा का विशेष महत्व होता है.. यहां देश के तमाम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और हर राज्य के मुख्यमंत्री मां के दरबार में आते हैं। यहां बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक बड़े अभिनेता भी मन के दरबार में दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।

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इसी खिड़की से किए जाते हैं मां के दर्शन - फोटो : अमर उजाला
छोटी सी खिड़की से होते हैं दर्शन
बता दें कि इस सिद्धपीठ की स्थापना 1935 में स्वामीजी द्वारा की गई। ये चमत्कारी धाम स्वामीजी के जप और तप के कारण ही एक सिद्ध पीठ के रूप में जाना जाता है। भक्तों को मां के दर्शन एक छोटी सी खिड़की से ही होते हैं। मंदिर प्रांगण में स्थित वनखंडेश्वर महादेव शिवलिंग को महाभारत काल का बताया जाता है। साथ ही यहां किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी नहीं की जाती है। कहा जाता है कि मां पीतांबरा देवी अपना दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं। मां के दर्शन से सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को ललित मोदी कनेक्शन मामले में राजनीतिक संकट चल रहा था। तब वसुंधरा यहां मां से आशीर्वाद लेने आई थीं। उन्होंने यहां यज्ञ भी करवाया था। वहीं अभिनेता संजय दत्त को जब जेल जाना पड़ा था, तब उन्होंने भी यहां आकर पूजन करवाया था। 

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मां के दर्शन को लगती हैं कतारें - फोटो : अमर उजाला
धूमावती का एकमात्र मंदिर भी यहीं
वहीं पीताम्बरा पीठ के परिसर में ही मां भगवती धूमावती देवी का देश का एक मात्र मंदिर है। ऐसा कहा जाता है कि मंदिर परिसर में मां धूमावती की स्थापना न करने के लिए कई लोगों ने स्वामीजी महाराज को मना किया था। तब स्वामी जी ने कहा कि- मां का भयंकर रूप तो दुष्टों के लिए है, भक्तों के प्रति ये अति दयालु हैं। समूचे विश्व में धूमावती माता का यह एक मात्र मंदिर है। मां धूमावती की आरती सुबह-शाम होती है, लेकिन भक्तों के लिए धूमावती का मंदिर शनिवार को सुबह-शाम 2 घंटे के लिए खुलता है। मां धूमावती को नमकीन पकवान, जैसे- मंगोडे, कचौड़ी व समोसे आदि का भोग लगाया जाता है।मां पीताम्बरा बगलामुखी का स्वरूप रक्षात्मक है।

 
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