बरसों से उठ रही शिप्रा शुद्धिकरण की मांग गुरुवार को धरातल पर आई। अफसरों व जनप्रतिनिधियों ने शिप्रा शुद्धिकरण अभियान का शुभारंभ किया। 15 मार्च तक यह अभियान चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन हजारों लोग श्रमदान कर शिप्रा की सफाई करेंगे।
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शिप्रा नदी के घाट पर शुद्धिकरण के लिए जुटे लोग
- फोटो : अमर उजाला
कचरे के ढेर और गंदगी से जूझ रही मोक्षदायिनी शिप्रा की सूरत संवरने की उम्मीद जागी है। इसके शुद्धिकरण की मांग उठने के बाद गुरुवार से अभियान शुरू हुआ है जिसे जन आंदोलन के रूप में 15 मार्च तक चलाया जाएगा। हालांकि जिस इच्छाशक्ति से गुरुवार को अभियान शुरू हुआ वह आगे भी बरकरार रही तो जरूर शिप्रा का स्वरूप निखर जाएगा, वरना हर बार की तरह इस बार भी अभियान महज सरकारी खानापूर्ति बनकर रहेगा और शिप्रा गंदगी से जूझती रहेगी।
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प्रशासिनक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के साथ ग्रामीणों ने की भागीदारी
- फोटो : सोशल मीडिया
बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने शिप्रा शुद्धिकरण अभियान का शुभारंभ किया। शिप्रा नदी पहुंचकर श्रमदान किया। कलेक्टर ने फावड़ा चलाया तो विधायक ने तगारी उठाई। बड़ी संख्या में लोग सफाई के लिए जुटे। शुभारंभ के दौरान हाटपीपल्या विधायक मनोज चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह राजपूत, कलेक्टर चन्द्रमौली शुक्ला, नगर निगम कमिश्नर विशाल सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्य़क्ष राजीव खंडेलवाल सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। अभियान में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने श्रमदान के साथ क्षिप्रा मैया की पूजा की और पौधारोपण भी किया। शिप्रा शुद्धिकरण अभियान में पहले दिवस ग्राम शिप्रा (सुकल्या) के ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और स्कूल/कॉलेजों के विद्यार्थियों ने श्रमदान किया।
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विधायक मनोज चौधरी ने उठाई तगारी
- फोटो : सोशल मीडिया
इस पावन नदी के तट पर लगता है कुंभ का मेला
विधायक मनोज चौधरी ने कहा कि शिप्रा को शुद्ध रखने की जिम्मेदारी हम सब की है। 15 मार्च तक जन आंदोलन के रूप में शिप्रा शुद्धिकरण अभियान चलाया जा रहा है। सभी जिलेवासी अभियान में बढ़चढ़कर भाग लें। हम सभी को
यह प्रयास करना चाहिए कि शिप्रा नदी को साफ-स्वच्छ एवं निर्मल बनाएं। हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि मोक्षदायिनी शिप्रा के तट पर कुंभ का मेला लगता है। यह नदी हमारे क्षेत्र से होकर गुजर रही है। इसलिए हम सभी को इसे शुद्ध बनाना चाहिए।
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अभियान के बारे में बताते कलेक्टर शुक्ला
- फोटो : सोशल मीडिया
शिप्रा के स्मरण मात्र से मिलता है मोक्ष
कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला ने कहा कि मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के पास सर्विस करने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि गंगा जी में स्नान करने से मुक्ति मिलती है। नर्मदा जी के दर्शन मात्र से पाप मुक्त होते हैं, पर क्षिप्रा के स्मरण मात्र से मोक्ष मिल जाता है। इसलिए इस नदी को मोक्षदायिनी कहते हैं। क्षिप्रा नदी के शुद्धिकरण अभियान में सभी सहभागी बनें। उन्होंने सभी सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक संगठन, एनजीओ तथा स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थीगणों से आग्रह किया वे इस अभियान में सहभागिता कर अभियान को सफल बनाएं।
रोज एक हजार लोग करेंगे श्रमदान
शिप्रा शुद्धिकरण अभियान में शिप्रा से लगी ग्राम पंचायत बराय, दखनाखेड़ी, छापरी, भड़ापिपल्या, कुमारिया, शिप्रा (सुकल्या), रूपाखेड़ी, लोहारपिपल्या, गदईशा पिपल्या, आंट, सिरोंज, देवर और पटाड़ा के नागरिक श्रमदान करेंगे। अभियान में जनसहयोग से शिप्रा किनारे पौधारोपण किया जायेगा। अभियान में प्रतिदिन एक ग्राम पंचायत के लगभग एक हजार लोग श्रमदान करेंगे। अभियान में साधु, संत, जनप्रतिनिधि,समाजिक संगठन, स्कूल, कॉलेजों के विद्यार्थी, शिप्रा से लगी इण्डस्ट्री के कर्मचारियों और मजदूर भी श्रमदान करेंगे। ग्रामीणों द्वारा भजन और कीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा। शिप्रा से लगी ग्राम पंचायतों के नागरिकों को शिप्रा को स्वच्छ रखने के लिए, घाट और पुल पर गंदगी नहीं करने के लिए लगातार प्रेरित किया जाएगा। शिप्रा को स्वच्छ रखने का सभी नागरिक संकल्प भी लेंगे।