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MP: वकील जिसे बनना था गांव का सरपंच, बन गया हत्यारा; सवाल- दुष्कर्म किया था या नहीं? छतरपुर गोलीकांड की कहानी

Wed, 09 Oct 2024 07:51 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर

सार

यह पूरा मामला छतरपुर जिले के एक गांव का है। जहां सोमवार को आरोपी भोला अहिरवार ने  दुष्कर्म पीड़िता के घर में घुसकर तीन लोगों को गोली मारी थी। अगले दिन मंगलवार को आरोपी ने खुद को गोली मार ली। भोला पेशे से वकील था, सरपंच का चुनाव भी लड़ चुका था। 
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छतरपुर गोलीकांड का मृतक आरोपी भोला अहिरवार। - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के छतरपर जिले में दुष्कर्म पीड़ता समेत तीन को गोली मारने वाले आरोपी युवक भोला ने मंगलवार को अपनी कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इससे पहले उसने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपनी लोकेशन एसपी को बताई थी। सोशल मीडिया पर लिखे पोस्ट में आरोपी ने खुद को बेकसूर बताया था। उसने कहा था- मैंने किसी का रेप नहीं किया, यह पूरा गांव जानता है। आरोपी युवक अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन वह जाते-जाते यह सवाल जरूर छोड़ गया है कि क्या वह बेकसूर था? क्या उसे साजिश के तहत दुष्कर्म के मामले में फंसाया गया? क्या इसी के चलते उसने हथियार उठाकर तीन लोगों को गोली मार दी। जिसमें से एक की मौत हो गई, दुष्कर्म पीड़िता और उसके चाचा का इलाज चल रहा है। आइए, अब जानते हैं छतरपुर गोलीकांड की पूरी कहानी?  

सबसे पहले जानिए क्या है मामला? 
यह पूरा मामला छतरपुर जिले के एक गांव का है। सोमवार सुबह करीब 11 बजे आरोपी भोला अहिरवार नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के घर में घुस गया, उसके हाथ में कट्टा था। आरोपी ने घर में घुसकर नाबालिग से के साथ मारपीट की और उस पर दुष्कर्म केस में राजीनामा करने का दबाव बनाया। पीड़िता के 65 साल के दादा ने उसे रोकने की कोशिश तो आरोपी भोला ने उन्हें गोली मार दी। इसके बाद आरोपी ने दुष्कर्म पीड़िता को भी गोली मारी और भागने की कोशिश की। धर से निकलते ही उसे पीड़िता का 23 साल का चाचा मिल गया, उसने आरोपी को पकड़ने की कोशिश की तो भोला ने उसे भी गोली मार दी और फरार हो गया। परिजनों ने सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने दादा को मृत घोषित कर दिया। गंभीर रूप से घायल चाचा को इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया, जबकि दुष्कर्म पीड़िता का जिला अस्पताल में शुरू किया गया। 

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छतरपुर गोलीकांड के आरोपी ने खुद को गोली मारी। - फोटो : अमर उजाला
गोलीकांड के पीछे का कारण क्या?
पुलिस के अनुसार 30 साल के भोला अहिरवार ने करीब दो महीने पहले गांव में रहने वाली नाबालिग से दुष्कर्म किया था। पीड़िता ने उसके खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। इसके बाद से आरोपी भोला फरार बताया जा रहा था। आरोप है कि वह पीड़ित परिवार पर केस में राजीनामा करने का दबाव बना रहा था। लेकिन, पीड़ित परिवार ऐसा करने के लिए तैयार नहीं था। इसी के चलते बीते सोमवार को आरोपी ने पीड़िता के घर में घुसकर वारदात को अंजाम दिया। 

जानिए कौंन था आरोपी भोला अहिरवार?
छतरपुर जिले के मौराहा गांव में रहने वाला भोला अहिरवार पेशे से वकील था।  वह छतरपुर न्यायालय में प्रैक्टिस भी करता था। वह गांव का सरपंच भी बनना चाहता था। साल 2022 में भोला ने सरपंची का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वह अपने निकटतम प्रतिद्वंदी पम्मी अहिरवार से 182 वोटों से हार गया था।  
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भोला के घर के बाहर पड़ा सन्नाटा। - फोटो : अमर उजाला
गोलीकांड के बाद क्या हुआ?
सोमवार को हुए गोलीकांड के बाद पुलिस ने आरोपी भोला अहिरवार की तलाश के लिए एटीएस टीम का गठन किया गया था। उस पर 20 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया गया था। मंगलवार मंगलवार सुबह करीब नौ बजे आरोपी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट की और एसपी छतरपुर को खुद की लोकेशन बताई। इसके अलावा उसने खुद को निर्दोश बताते हुए कई बातें लिखी। आरोपी की लोकेशन मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उसे पकड़ने की तैयारी शुरू की। बताया गया कि इस दौरान उसने पुलिस पर फयारिंग कर दी, पुलिस ने जवाबी फायरिंग की। इस बीच उसने खुद की कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। सागर रेंज के आईजी प्रमोद वर्मा का कहना है कि पुलिस से घिरे होने के कारण घबराहट में उसने ऐसा किया था।   

भोला के आखिरी शब्द....
'मैंने किसी का रेप नहीं किया, यह पूरा गांव जानता है। लेकिन, मुझे फिर भी साजिश के अनुसार फंसाया गया, सिर्फ पैसे के लिए और पैसे ले देकर मेरे खिलाफ पोस्को 376 जैसी धारा में केस दर्ज करवाया गया। हां, यह जरूर है कि जो कल हुआ वो मैंने ही किया है। एसपी साहब से मेरा कहना है कि मैं यहां सिद्ध बाबा पूछी वाले रोड के यहां हूं, यहीं मिल जाऊंगा आप आ जाएं। सिविल लाइन टीआई ने बाल्मीक चौबे ने पैसे लेकर मुकदमा कायम किया था, मुझे अपराधी बनाने के लिए। मैं जो गाड़ी लाया था, वह किसी की मांग कर लाया था, उसे इस बारे में कुछ नहीं पता था कि मैं क्या करने वाला हूं। और किसी को जबरदस्ती मुजरिम नहीं बनाना। मेरे खिलाफ जब मुकदमा कायम हुआ, उसमें प्रेमचंद डालू सरपंच और एवीएन दीपक पाली, इन दो दलालों ने उन्हें भटकाया और मुकदमा कायम करवाया। यह पोस्ट में एक मजदूर के मोबाइल से कर रहा हूं जो यहां काम कर रहा है'। 
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पुलिस ने चिपकाया था नोटिस। - फोटो : अमर उजाला
पीड़िता बोली- गांव की एक लड़की से भिजवाई थी राजीनामे के लिए खबर
पीड़ित परिवार का आरोप है कि भोला राजीनामा नहीं करने पर जान से मारने की धमकी कई दिनों से दे रहा था। उसने गांव की एक लड़की जो उससे बात करती थी, उसके जरिए पीड़िता के पास राजीनामा करने की खबर भिजवाई थी।  उस लड़की ने दुष्कर्म पीड़िता से कहा था-तुमने उसकी (भोला की) रिपोर्ट क्यों कर दी। तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। इसके जवाब में पीड़िता ने कहा था- मैं तो करूंगी, मुझे कोई राजीनामा नहीं करना है। 

भोला के भाई ने उठाया सवाल? 
मृतक भोला अहिरवार के भाई ने फेसबुक पोस्ट लिखकर अपना दर्द साझा किया है। उसने लिखा- जितना अपराध करना गलत है, उतना ही अपराधी बनाना भी गलत है। अपराध करने की सजा तो भोला ने खुद को गोली मार के दे दी। लेकिन, क्या छतरपुर पुलिस अपराधी बनाने वाली पुलिस को सजा देगी या जाति के नाम पर पुलिस वालों को बचा कर भोला अहिरवार की फाइल को बंद कर दिया जाएगा। भोला अहिरवार भइया को फंसाया गया है। 
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