खजुराहो नृत्य समारोह
- फोटो : अमर उजाला
खजुराहो नृत्य समारोह की अनुषांगिक गतिविधि "लयशाला" की चौथी सभा में कला रसिक और नई पीढ़ी के कलाकार भरतनाट्यम एवं कथक जैसी महत्वपूर्ण शैलियों के विविध आयामों से रूबरू थे। भरतनाट्यम के सुप्रसिद्ध गुरु मनु मास्टर ने दक्षिण भारत की प्रमुख नृत्य विधा पर संवाद सह प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि भरतनाट्यम को सिर्फ प्रदर्शन कला समझना ही काफी नहीं है, यह अनुष्ठानिक नृत्य शैली है, जिसका आध्यात्मिक महत्व अधिक है। उन्होंने तंजावुर वाणी के अड़वों का सूक्ष्म रूप से विवरण प्रस्तुत किया, साथ ही नृत्य की ताल और अभिनय पक्ष को भी रेखांकित किया। जयदेव रचित अष्टपदी और श्री बालमुरली कृष्ण द्वारा रचित तिल्लाना में स्वयं द्वारा कोरियोग्राफिक प्रस्तुति का प्रदर्शन भी किया। उन्होंने भरतनाट्यम की परम्पराओं और उसके इतिहास का विवरण भी प्रस्तुत किया।
प्रदर्शन के लिए उनका साथ शिष्य प्रणव प्रदीप और कीर्तना अनिल ने दिया। इसके बाद कथक पर संवाद सह प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हुआ। जिसे सुप्रसिद्ध नृत्यांगना और गुरु सुश्री शमा भाटे ने प्रस्तुत किया। सुश्री भाटे ने लय की कथा की बात की। उनका संवाद गुरु वंदना से प्रारंभ होकर कोरोग्राफिक प्रस्तुति तक चला। गुरु वंदना के विषय में उन्होंने बताया कि जो भी सत्य और सुंदर है, वह वंदना है। इसके बाद अभिनय पक्ष की कथा कहने कवित्त की बात हुई। उन्होंने अपनी शिष्याओं के सहयोग से पारंपरिक और स्वरचित कवित्त का प्रदर्शन किया। गत भाव पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि भाव में सेंस ऑफ टाइमिंग पता होना आवश्यक है। अगले क्रम में तराना, कजरी और अंत में नंदनार, जो एक शिवभक्त की कहानी पर आधारित थी, का प्रदर्शन किया।
भारतीय नृत्य के उन महत्पूर्ण घटकों को प्रदर्शित करने के उद्देश्य नेपथ्य प्रदर्शनी का संयोजन किया गया है जिनका उद्देश्य कला को संपूर्णता प्रदान करना है। इन घटकों में वेशभूषाएं, मंच सज्जा, वेशभूषा—परिधान और रूप सज्जा, वाद्ययंत्र, साहित्य इत्यादि शामिल है। इस प्रदर्शनी का संयोजन अनूप जोशी ‘बंटी’ ने किया है। यह प्रदर्शनी विभिन्न भारतीय नृत्यों का सांस्कृतिक परिदृश्य और उनकी यात्रा पर आधारित है। यहां आने वाले कलाप्रेमियों के लिए यह प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसमें कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, मोहिनीअट्टम, मणिपुरी, कथकली, सत्रिया, कुचिपुड़ी, छाऊ जैसी नृत्य शैलियां शामिल हैं। प्रदर्शनी में नृत्यों के सुप्रसिद्ध नृत्य कलाकारों के छायाचित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं, ताकि कला रसिक नृत्य के साधकों को भी जान पाएं।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग एवं उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के साझा प्रयासों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन, छतरपुर के सहयोग से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में विश्वविख्यात "50वां खजुराहो नृत्य समारोह" आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर निदेशक उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी श्री जयंत भिसे ने आमंत्रित कलाकारों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया।