छतरपुर जिले के अतरार जनपद से सदस्य दुलीचंद्र बंशकार बुंदेली वाद्य यंत्र रमतूला बजाकर कला और संस्कृति को सहेज रहे हैं। जनप्रतिनिधि होने के बावजूद भी वे अपने परिवार का भरण पोषण रमतूला बजाकर करते हैं।
मध्य प्रदेश के छतरपुर में जनपद सदस्य दुलीचंद्र बंशकार बुंदेलखंड अंचल के एक ऐसे जनप्रतिनिधि हैं, जिन्होंने नेता बनने के बाद भी अपना पैतृक काम नहीं छोड़ा। वे आज भी शादियों और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में जाकर पारंपरिक वाद्य यंत्र रमतूला बजाते हैं और उससे होने वाली आय से अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।
पुरखों की परंपरा को बढ़ा रहे आगे
मीडिया से बात करते हुए रमतूला वादक और जनप्रतिनिधि दुलीचंद्र बंशकार ने कहा कि उनके परिवार में वाद्य यंत्र को बजाने का काम तीन पीढ़ियों से जारी है। उनके दादा-पिता इस यंत्र को बजाते थे, वे भी उसी पारिवारिक पंरपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे 18 साल की उम्र से रमतूला वाद्य यंत्र को बजा रहे हैं। करीब 300 सालों से इस वाद्य यंत्र को बजाने का काम उनका परिवार बिना रूके कर रहा है। खुद दुलीचंद्र बीते 42 सालों से इसे बजा रहे हैं।
रमतूला को बजाने के लिए वे क्षेत्र के साथ ही प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में जाते हैं। शुभ कार्यों में इस वाद्य यंत्र को बजाकर उन्हें 11 सौ से लेकर 21 सौ रुपये तक की आमदनी हो जाती है। लोग उन्हें जहां भी ले जाती हैं, वे रमतूला बजाने वहां पहुंच जाते हैं। उन्हें रमतूला बजाकर बेहद खुशी मिलती है। बागेश्वर धाम में भी वह बुंदेली वाद्य यंत्र रमतूला बजा चुके हैं।
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जनपद सदस्य बनने के बाद भी नहीं छोड़ा रमतूला बजाना
- फोटो : अमर उजाला
रमतूला बन चुका है पहचान
जब उनसे पूछा गया कि जनप्रतिनिधि बनने के बाद भी वे रमतूला बजाकर गुजारा कर रहे हैं क्या उन्हें शर्मिंदगी महसूस नहीं होती, तो बड़ी सादगी से जवाब देते हुए दुलीचंद्र बंशकार ने कहा कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। मेरे पुरखे रमतूला बजाया करते थे। यह वाद्ययंत्र ही मेरी पहचान है। क्षेत्र के लोग भी मुझे इसी के जरिए जानते हैं। उन्होंने कहा कि मैं अपने क्षेत्र अतरार जनपद के लोगों की समस्याओं को भी हल करता हूं और उनकी मदद भी करता हूं। वहीं, क्षेत्र के लोग दुलीचंद्र की सादगी और सरलता की तारीफ करते हैं।
रमतूला को लेकर प्रचलित हैं कई किवदंतियां
बुंदेली वाद्य यंत्र रमतूला को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। शंख की तरह इसे बजाने की भी ट्रिक होती है। हर व्यक्ति के लिए इसे बाजाना आसान नहीं होता। गुजरे दौर में इसे राजा महाराजाओं के यहां बजाया जाता था।
शुभ कार्यों में बजाया जाता है रमतूला
- फोटो : अमर उजाला
पॉजिटिव एनर्जी का होता है संचार
रमतूला ऐसा वाद्य यंत्र है, जिसे बजाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शुद्ध तांबे से निर्मित इस यंत्र को बजाने के पीछे तांत्रिक, साइंटिफिक रीजन भी हैं। बुंदेलखंड में रमतूला को बजाकर शुभ और धार्मिक कार्यों की शुरुआत की जाती है। वहीं, इसे बजाने वाला वादक इसके एवज में पैसे पारिश्रमिक के तौर पर नहीं बल्कि प्रसाद से तौर पर ग्रहण करता है। यह शंख की तरह पवित्र और पूज्य भी माना जाता है।