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छतरपुर: ऑपरेशन गंगा से घर वापसी, यूक्रेन से लौटे छतरपुर के तीन छात्र, वहां के हालातों का डर अब भी बरकरार

Sun, 06 Mar 2022 06:43 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर

सार

छतरपुर के दो जुड़वा भाई पारस और पराग गुप्ता सहित एक छात्रा शिवानी विश्वकर्मा आज यूक्रेन से अपने वतन घर लौट आए हैं। वह यूक्रेन में एमबीबीएस के पहले वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि वहां के हालातों से बना डरा अब भी हमारे मन में है।
 
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यूक्रेन से लौटे छतरपुर के तीन छात्र। - फोटो : अमर उजाला
छतरपुर के दो जुड़वा भाई पारस और पराग गुप्ता सहित एक छात्रा शिवानी विश्वकर्मा आज यूक्रेन से अपने वतन घर लौट आए हैं। वह यूक्रेन में एमबीबीएस के पहले वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि वहां के हालातों से बना डरा अब भी हमारे मन में है।

जानकारी के अनुसार यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए केंद्र सरकार ऑपरेशन गंगा चला रही है और इसी ऑपरेशन गंगा के तहत ही इन छात्रों की घर वापसी हुई है। छात्रों ने यूक्रेन के युद्ध के हाल बताए तो वहीं उन्हें हुई परेशानियों का भी बखान किया। छात्र-छात्राओं और उनके परिजनों ने केंद्र सरकार सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।
 
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बच्चों के लौट आने से माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। - फोटो : अमर उजाला
जुड़वा भाई पारस और पराग गुप्ता कल यूक्रेन से दिल्ली पहुंचे थे जो आज अपने घर छतरपुर पहुंच गए हैं। अपने बच्चों के सकुशल घर आने पर मां और पिता परिजनों ने फूल मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया तो वहीं मां ने अपने दोनों बेटों को भावुक होकर गले से लगा लिया और पिता ने अपने बच्चों को हाथों से मिठाई खिलाई।

दोनों ने बताया कि यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध के चलते यूक्रेन में पढ़ रहे छात्र फंस गए हैं। और अपने अपने वतन पहुंचने की जद्दो-ज़हद में लगे हुए हैं। कई भारतीय छात्र अब भी फंसे हुए हैं जो अब समय-समय पर अपने वतन वापसी कर रहे हैं।
 
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छात्रा के घरवालों ने मुंह मीठा कराकर स्वागत किया। - फोटो : अमर उजाला
छतरपुर की शिवानी विश्वकर्मा भी अपने घर लौटी है। शिवानी के परिजनों ने भी ढोल-नगाड़े और फूल मालाओं से शिवानी का स्वागत किया है। शिवानी छतरपुर के इलेक्ट्रानिक व्यवसायी रामस्वरूप विश्वकर्मा की बेटी हैं जो यूक्रेन के में रहकर पढ़ाई कर रही थीं। वे 3 महीने पूर्व ही यूक्रेन गई थीं। 3-4 दिन पहले ही शिवानी ने हमें यूक्रेन रोमानिया अबर्दर के हालातों के वीडियो भेजे थे। जो बमुश्किल 2 दिनों में यूक्रेन बॉर्डर को पार कर रोमानिया पहुंची थीं, जहां टेंटों में रुकने की व्यवस्था की गई थी।
 
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