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Bhind: अब डाकू दर्शन नहीं, चंबल की खूबसूरती और विकास की बातें, आयोजित होगा तीन दिवसीय पंचनद कैम्पिंग फेस्टिवल

Wed, 26 Apr 2023 01:59 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंड

सार

Bhind: अब डाकू दर्शन नहीं, चंबल की खूबसूरती और विकास की बातें, आयोजित होगा तीन दिवसीय पंचनद कैम्पिंग फेस्टिवल
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चंबल में पाए जाने वाले ऊंट - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की 2,100 वर्ग मील दूरी तय करके राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य यहां विराम पाता है। इससे यहां चांदी की तरह चमकते विशाल रेतीले मैदान दिखते हैं। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में तमाम जलचरों और नभचरों का ठिकाना होने से रेत खनन पर प्रतिबंध है। उत्तर प्रदेश के जालौन, औरैया और इटावा जिले सहित मध्यप्रदेश के भिंड जनपद मुख्यालयों से समान दूरी पर पंचनद संगम है। जो विश्व का सबसे अनोखा स्थल माना जाता है। यहां चंबल, यमुना, सिंध, पहुंज और क्वारी नदियों का महासंगम होता है। चंबल-अंचल के बीहड़ों में आध्यात्मिक और पर्यटन के नजरिए से यह अद्भुत स्थल है। 
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पंचनद कैम्पिंग फेस्टिवल - फोटो : अमर उजाला
पांच नदियों के संगम पर चांदी की तरह चमकते विशाल रेतीले मैदान गोवा की खूबसूरती को मात देते हैं। चंबल-अंचल में बड़े पैमाने पर रेगिस्तान का जहाज कहे जाने वाले ऊंट पाले जाते थे। लेकिन अब ऊंट पालकों की संख्या में लगातार गिरावट देखी जा रही है।
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ऊंटों की तादाद में भारी गिरावट देखी जा रही - फोटो : अमर उजाला
एक दशक से अधिक समय से चंबल-अंचल की बेहतरी के लिए कार्य करने वाले चंबल विद्यापीठ के संस्थापक डॉ. शाहआलम राना कहते हैं कि बीहड़वासियों को सामान उठाने के लिए ऊंट एक सहारा रहा है। चंबल नदी के किनारे रहने वाले ऊंट पालकों पर आये दिन भारतीय वन अधिनियम और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज होती रहती है। इससे ऊंटों की तादाद में भारी गिरावट देखी जा रही है। ऊंट पालकों की भी आजीविका का सवाल लगातार पीछा करता रहा है।

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ऊंट की सवारी फोटोग्राफी के शौकीने के लिए चार चांद लगाएगी - फोटो : अमर उजाला
अगर चंबल में ऊंटों के मार्फत पर्यटन के रास्ते खुलते हैं तो ऊंटों की तादाद में और इजाफा हो सकेगा। तीन दिवसीय पंचनद कैम्पिंग फेस्टिवल में सैलानी ऊंट उत्सव का आनंद ले सकेंगे। सजे धजे ऊंट की सवारी फोटोग्राफी के शौकीने के लिए जहां चार चांद लगाएगी, वहीं पलायन की मार से जूझ रहे बीहड़वासियों के लिए रोजगार के अवसर भी मुहैया कराएगी।
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तीन दिवसीय सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन में सैलानी अपनी रूचि के अनुसार हिस्सेदारी कर सकेंगे - फोटो : अमर उजाला
चंबल में पर्यटन को बढ़ाने के मकसद से इस तीन दिवसीय सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन में सैलानी अपनी रूचि के अनुसार हिस्सेदारी कर सकेंगे। दरअसल, दस्यु दलों के सफाए के बाद सैलानी यहां बिना रोक-टोक के अब पहुंच सकेंगे। आजादी से पहले और आजादी के बाद सरकारों की बेरूखी से जो ब्रांडिंग पंचनद की होनी चाहिए थी, वो नहीं की गई। लिहाजा पंचनद का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जितनी लोकप्रियता और ख्याति इस महासंगम को मिलनी चाहिए थी, वो नहीं मिल सकी।
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चंबल की खूबसूरती और विकास की बातें - फोटो : अमर उजाला
लंबे अरसे से पंचनद सरकारी अनदेखी के कारण पंचनद को देश का सबसे बड़ा पर्यटन हब नहीं बन पाया। अब अगर सरकारें नेकनीयती से पंचनद और इसके आस-पास ठोस रणनीति बनाकर विकास के थमे पहिए को घुमाती हैं तो आने वाले दिनों में पंचनद घाटी विश्व पर्यटन मानचित्र पर चमक सकती है।
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पंचनद कैम्पिंग फेस्टिवल - फोटो : अमर उजाला
पांच नदियों के संगम पर तीन दिवसीय ‘पंचनद कैम्पिंग फेस्टिवल’ की तैयारी को लेकर जिला पर्यटन अधिकारी इटावा, जिलाधिकारी औरैया, झूमके और चंबल विद्यापीठ के पदाधिकारियों की बैठक बीते 21 अप्रैल की शाम हो चुकी है। आयोजन को सफल बनाने के लिए अभी से आयोजन समिति से जुड़े लोग अपने हिस्से की तैयारी में लगे हुए हैं।
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