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RSS को सांप्रदायिक बताने वालों पर भड़के सीएम योगी, कहा-चर्चा करा लें

Sun, 14 May 2017 09:57 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को साम्प्रदायिक बताने वालों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जो लोग मलिन बस्तियों के बीच निस्वार्थ भाव से काम कर लोगों में देश प्रेम की भावना भरते हैं उन्हें सांप्रदायिक कहा जाता है और जो लोग बहुसंख्यक समाज और महापुरुषों को गालियां देते हैं, तुष्टीकरण की राजनीति कर समाज को बांटने का काम करते हैं। उन्हें मानवतावादी कहा जाता है। ऐसे में एक बार बहस हो जाए कि कौन राष्ट्रवादी है और कौन सांप्रदायिक।
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सीएम योगी लखनऊ के केजीएमयू के साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित महाराज सुहेलदेव हिंदू विजयोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, राजनीतिक स्वार्थ के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़कर समाज को बांटा गया। सच्चा इतिहास सामने आएगा तो तमाम मुखौटे उतर जाएंगे, जनता जिनका सम्मान करती है, उनका अपमान करेगी। इतिहास को बदलने की शरारत आजादी के बाद से ही शुरू हो गई थी।
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योगी ने कहा, स्वतंत्रता आंदोलन को विद्रोह बताया गया। महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह, गुरु तेगबहादुर और शिवाजी को छोटे दायरे में देखा गया। इतिहास को विकृत करने वालों को बेनकाब किए जाने की आवश्यकता है।

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योगी ने संघ के विरोधियों को नहीं बख्शा। बिना नाम लिए कहा, ‘जो भी लोग वोट बैंक बनाकर तुष्टीकरण की नीति के अंतर्गत समाज को बांटने का काम आजादी के बाद से कर रहे हैं, वे अपने आपको मानवतावादी बताते हैं। इस देश के बहुसंख्यक समाज को गाली देते हैं, महापुरुषों को अपमानित करते हैं। भारत के इतिहास को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करते हैं, भारत के विखंडन की नींव रखते हैं, वे अपने आपको मानवतावादी कहते हैं, लेकिन जो भारत को कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक राष्ट्र, एकता के समर्थक हैं, जिनके लिए सेवा ही सब कुछ है, मातृभूमि को परमवैभव पर पहुंचाना ही जिनका लक्ष्य है, जो गांव, गरीब, किसान और मातृशक्ति के सम्मान के लिए काम करते हैं, उन्हें सांप्रदायिक कहकर अपमानित करने का प्रयास होता है। तब आवश्यक है कि इस प्रकार की चर्चा को आगे बढ़ाया जाए। हम खुली चर्चा को तैयार हैं।’
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सीएम ने कहा, राजनीतिक स्वार्थ के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़कर समाज को बांटा गया। सच्चा इतिहास सामने आएगा तो तमाम मुखौटे उतर जाएंगे, जनता जिनका सम्मान करती है, उनका अपमान करेगी। इतिहास को बदलने की शरारत आजादी के बाद से ही शुरू हो गई थी। स्वतंत्रता आंदोलन को विद्रोह बताया गया। महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह, गुरु तेगबहादुर और शिवाजी को छोटे दायरे में देखा गया। इतिहास को विकृत करने वालों को बेनकाब किए जाने की आवश्यकता है।
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आक्रांताओं से रिश्ते जोड़ने वालों के लिए कोई स्थान नहीं
योगी ने कहा, ऐसा कौन नागरिक होगा जो अशफाक उल्ला खां, वीर अब्दुल हमीद, एपीजे अब्दुल कलाम के प्रति सम्मान का भाव न रखता हो, लेकिन आक्रांता गजनवी, गौरी, खिलजी, बाबर और औरंगजेब से रिश्ते जोड़ने का प्रयास करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
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