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तनाव और हाई ब्लड प्रेशर से बढ़ता है इस बीमारी का खतरा, कम खाएं चीनी-नमक

Thu, 29 Oct 2020 04:11 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
चेहरा अचानक टेढ़ा होने लगे, बोलने में दिक्कत महसूस हो, दिमागी रूप से भ्रम की स्थिति पैदा होने लगे, चलने में एक पैर और एक हाथ शक्तिहीन लगने लगे तो तत्काल चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। यह ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। कई बार उल्टी भी होती है। 60 वर्ष से ऊपर के लोगों में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण ब्रेन स्ट्रोक है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी, नमक, मैदा से परहेज कर और धूम्रपान व मदिरापान से दूर रहकर ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को कम कर सकते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए ही 29 अक्तूबर को वर्ल्ड ब्रेन स्ट्रोक डे मनाया जाता है।  पेश है एक रिपोर्ट...।

 
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डॉ कुलदीप यादव - फोटो : अमर उजाला
छह घंटे के अंदर इलाज मिले तो बचे जान
लोहिया संस्थान के डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून की आपूर्ति बाधित होने से ब्रेन स्ट्रोक आता है। अंग सुन्न होने या लकवा जैसी स्थिति, बोलने में दिक्कत, मुह से लार निकलने लगती हैं। तत्काल इलाज न मिलने पर अंग काम करना बंद कर देते हैं। छह घंटे के अंदर इलाज मिल जाए तो मरीज को अपाहिज होने से बचाया जा सकता है। स्ट्रोक पड़ने के मामले में 13 फीसदी कारण हाई ब्लड प्रेशर होता है। 87 फीसदी मामले में ब्रेन में रक्त अवरोध होना है।

 
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आरके गर्ग - फोटो : अमर उजाला
लक्षण दिखते ही कराएं सीटी स्कैन
केजीएमयू के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरके गर्ग ने बताया कि स्ट्रोक के कई कारण होते हैं। इसमें डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, हाई बीपी शामिल है। स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही तत्काल सीटी स्कैन कराएं। रिफाइंड तेल, चीनी, नमक और फ्राइड फूड ज्यादा मात्रा में खाने वाले लोगों को स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है।

 

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- फोटो : अमर उजाला
ब्रेन स्ट्रोक के प्रमुख कारण 
उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, शराब, धूम्रपान, मोटापा, जंक फूड का सेवन और तनाव है।
 
केजीएमयू ट्रॉमा में रिजर्व हैं पांच बेड
ब्रेन स्ट्रोक होने पर छह घंटे के अंदर इलाज की जरूरत होती है। केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए पांच बेड रिजर्व हैं। यहां तत्काल इलाज की व्यवस्था है।   
 
 
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- अचानक अंगों में कमजोरी आना।
- शरीर के किसी हिस्से में सुन्न महसूस होगा।
- देखने, सुनने व बोलने की शक्ति कम होना।
- चेहरे में टेढ़ापन, बोलने में समस्या होना। 
 
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