- शिवाकांत तिवारी ने पूछा, मेरी बहन को वो अवसर नहीं मिल रहे, जो मुझे इंजीनियरिंग कराने को मेरे माता-पिता उपलब्ध करा रहे। मैं कैसे उनकी सोच में बदलाव लाऊं?
विशेषज्ञ बोले : सोच में बदलाव तो शुरू हो चुका है, क्योंकि आप ऐसा सोच रहे हैं। बस आप ठान लीजिए कि आपको अपने माता-पिता से बात करनी है, उन्हें समझाना है कि वह बहन को आपसे कम न आंकें। इसमें आप काउंसलर और अपने शिक्षकों की मदद ले सकते हैं।
- जाह्नवी मिश्रा ने सवाल किया कि घर में रोक-टोक और रूढ़िवादी माहौल के लिए दादा-दादी जिम्मेदार हैं। उन्हें कैसे समझाएं?
विशेषज्ञ बोले : गलती दादा-दादी की नहीं, जिस दौर में वे पले-बढ़े उस माहौल की है। चिंता की कोई बात नहीं। वे अब बूढे़ हैं, आपकी केयर मांगते हैं। बड़े प्यार से उनसे बात कीजिए, उनको अपनी गतिविधियों का हिस्सा बनाइए। मोबाइल चलाना सिखाइए, उनके साथ टीवी देखिए और बात कीजिए। धीरे-धीरे वे जरूर बदल जाएंगे। बस संवाद कायम रहना चाहिए।