बारिश के लिए कौन-कौन से जतन नहीं होते। यूपी के कानपुर से सटे एक गांव में महिलाओं ने इस प्रचंड धूप में खेतो में हल चलाया।
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बारिश हो इसलिए महिलाओं ने'बैल बनकर'की जुताई
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कानपुर से सटे मरदनपुर गांव की महिलाओं ने बारिश होने के लिए एक बहुत ही प्राचीन टोटका किया। इन महिलाओं ने सूखे खेतों में हल चलाया।
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बारिश हो इसलिए महिलाओं ने'बैल बनकर'की जुताई
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खास बात यह थी कि हल चलाने की प्रक्रिया में जो काम बैल करता है वही काम महिलाएं करती नजर आईं। कुछ महिलाएं बैल की भूमिका में हल को अपने कंधों पर रखकर खींचती दिखीं तो कुछ हल को जमीन में गड़ाए हुए थीं।
बारिश हो इसलिए महिलाओं ने'बैल बनकर'की जुताई
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इस प्रचंड धूम में प्राचीन परंपरा और रीतियों के अनुरूप ही इन महिलाओं ने मंगलगीत गाए। यह सिलसिला एक घंटे से अधिक समय तक चलता रहा।