महिला की मौत के बाद रोते परिजन
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लापरवाही में हुई थी बच्चे की मौत
ट्रॉमा सेंटर में ही शनिवार को इलाज में लापरवाही से एक बच्चे की मौत हो गई थी। अमेठी निवासी पवन के नवजात बच्चे को घंटों इलाज नहीं मिला और वहां के स्टाफ ने उसका ऑक्सीजन मास्क हटाकर टॉमा के चौथे तल पर भेज दिया। ऑक्सीजन स्पोर्ट हटते ही बच्चे की मौत हो गई।
जांच को घंटों करना पड़ता
ट्रॉमा सेंटर में सीटी स्कैन के लिए मरीजों को दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। विभाग में भर्ती अति गंभीर मरीजों को डॉक्टर खुद सीटी स्कैन कराने को लाते हैं तो कैजुअल्टी के अति गंभीर मरीजों को तीमारदार खुद स्ट्रेचर पर धक्का लगाकर लाते हैं।
सीटी स्कैन के लिए सिर्फ एक ही मशीन
ट्रॉमा सेंटर में रोजाना 300-400 मरीज आते हैं। इनमें करीब 70 प्रतिशत मामले सड़क हादसे के आते हैं। वहीं, इसमें से हेड इंजरी के हर मामले में सीटी स्कैन जरूरी होता है। बावजूद इसके एक मशीन के भरोसे ही सीटी स्कैन हो रहा है। करीब दो साल पहले पीपीपी मॉडल पर दूसरी मशीन लगाने की कवायद हुई थी, लेकिन लग नहीं पाई है।
अति गंभीर मरीजों का सीटी स्कैन प्राथमिकता पर कराया जाता है। तीमारदार शिकायत करें तो मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ सुधीर सिंह प्रवक्ता, केजीएमयू।