अटल जी शायद इसी मौके के इंतजार में थे। इनकी लखनऊ में सभा हुई। पुरी बताते हैं, ‘अटल जी आए और बोले, एक जनाब ने लखनऊ की जमीनें बेचने का बीड़ा उठा रखा है। दूसरी तरफ यह नौजवान इन जमीनों को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। जिस झंडे वाले पार्क को बेचा जा रहा है वह आम पार्क नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास है। यह मेरे साथ अन्याय होगा कि हमारे ही संसदीय क्षेत्र में यह ऐतिहासिक पार्क बेच दिया जाए।