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घाघरा व सरयू के बढ़े जलस्तर ने से अवध के कई जिलों में दहशत, हजारों लोग फंसे, पलायन शुरू

Thu, 05 Jul 2018 10:34 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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बाढ़ - फोटो : amar ujala
यूपी के अवध के कई जिलों में सरयू व घाघरा नदी के जल में उफान से आसपास के कई जिलों में दहशत का माहौल है। जलस्तर बढ़ जाने से हजारों लोग फंस गए हैं। वहीं, फैजाबाद में पलायन शुरू हो गया है। जलस्तर से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले बाराबंकी, फैजाबाद, सीतापुर व बहराइच हैं। बहराइच में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से सात गांवों का संपर्क कट गया है। जिससे कि छह हजार लोग फंस गए हैं। बताया जा रहा है कि तराई व नेपाल के पहाड़ों पर रुक-रुक कर हो रही बारिश से घाघरा का जलस्तर बढ़ गया है।
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बहराइच में टापू पर बसे सात गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। यहां छह हजार लोग फंसे हैं। कायमपुर-सांवलपुरवा संपर्क मार्ग पर भी आवागमन ठप हो गया है। एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से महज 15 सेंटीमीटर दूर है। देर शाम तक नदी लाल निशान पार कर सकती है। तटवर्ती इलाकों में अफरातफरी की स्थिति है। लोगों ने आशियाना उजाड़ना शुरू कर दिया है। कटान के कारण भोर से दोपहर तक चार मकान घाघरा में समाहित हो चुके हैं।
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बाढ़ - फोटो : amar ujala
वहीं, बाराबंकी में घाघरा नदी के उफान आने से कटान ते ज हो गई है। जलस्तर खतरे के निशान को कभी भी पार सकता है। घाघरा का पानी गांव के किनारे खेतों में पहुंच गया है। ृकटान शुरू हो गई है। तराई के लोगों की धड़कने तेज हो गई हैं। कटान की खबर लगते ही प्रशासनिक अमला भी अलर्ट हो गया है। बुधवार को एडीएम ने मौके का निरीक्षण किया।

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बाढ़ - फोटो : amar ujala
बाराबंकी जिले की रामनगर, सिरौलीगौसपुुर व रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र के तराई के किनारे बसे तकरीबन एक दर्ज गांवों के निकट पानी पहुंच चुका है। मंगलवार से नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ। बुधवार को इसमं और बढ़ोतरी हो गई। खतरे के निशान के करीब पहुंची घाघरा का पानी करीब की सभी बस्तियों के निकट पहुंच गया है।
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बाढ़ - फोटो : amar ujala
इसके अलावा, फैजाबाद के गिरजा बैराज से छोड़ा गया पानी व पहाड़ों सहित मैदानी इलाकों में हो रही मानसूनी वर्षा से फैजाबाद में सरयू/घाघरा ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
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बाढ़ - फोटो : amar ujala
अभियंताओं का कहना है कि बृहस्पतिवार को सरयू खतरे के निशान को पार कर सकती है। उधर, खेतों से होकर आबादी में पहुंच रही नदी की धारा से कछारीय इलाकों से बंधे की ओर पलायन तेज हो गया है। जिला प्रशासन की ओर से अभी नाव समेत बचाव तैयारी नदारद दिख रही है।
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बाढ़ - फोटो : amar ujala
वहीं, सीतापुर में भी घाघरा नदी उफना रही है, नदी से उठती लहरें किनारों से टकराकर उसकी भयावहता को दर्शा रही हैं। कुछ इलाकों में पानी नदी के बाहर आ गया है तो कुछ जगहों पर वह तट को अपनी आगोश में समेट लेेने के लिए बेताब नजर आ रहा है। घाघरा का उफान मारता पानी रेउसा क्षेत्र के करीब 20 गांवों के बेहद करीब पहुंच गया है। क्षेत्र के बाशिंदे इसे बाढ़ का अलर्ट मान रहे हैं। शायद यही वजह है कि तटीय क्षेत्र के बाशिंदों ने अपने झोपड़ों को समेटकर सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन शुरू कर दिया है। हालांकि स्थिति अभी विकट नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे नदी के और विकराल होने की संभावना जताई जा रही है।
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इससे तटीय क्षेत्र के बाशिंदों में दहशत बरकरार है। खासकर चहलारी घाट के आसपास की आबादी बाढ़ की आशंका को लेकर बेहद दहशत में है। उधर बैराजों से सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे ग्रामीणों की आशंका को बल मिल रहा है। बुधवार की सुबह करीब 10 बजे घाघरा की लहरों के बीच करीब पांच नाव कटैला पुरवा घाट की तरफ आती नजर आई। लहरों से संघर्ष करते हुए जब ये नावें किनारे लगीं तो देखा कि इन नावों में किसी पर बाइक, किसी पर साइकिल तो किसी पर अनाज व गृहस्थी का अन्य सामान लदा हुआ था। पूछने पर ग्रामीणों ने बताया कि वे घाघरा नदी के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव में रहते हैं। अब घाघरा का पानी तेजी से बढ़ रहा है। इससे वे घर का कीमती व जरूरी सामान लेकर टापू से निकलकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ जा रहे हैं।
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