एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी को गोली मारने वाली पुलिस झूठ पर झूठ गढ़ कर मामले को दूसरा रंग देने की कोशिश में जुटी रही। पुलिस ने दावा किया कि विवेक ने तीन बार सिपाहियों को रौंदा। यही नहीं दावा किया कि सिपाही ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। पर, जिस जगह बाइक सवार सिपाहियों को रौंदने की बात कही जा रही है वहां से करीब चार सौ मीटर दूर विवेक की एसयूवी दुघर्टनाग्रस्त हुई। क्या हादसे केबाद दोनों सिपाही पैदल एसयूवी से तेज दौड़े? इतना तेज कि वे एसयूवी से आगे निकल गए और सामने से गोली मार दी? अगर नहीं, तो क्या गोली लगने के बाद भी वह भी सिर से पार होने के बाद कोई चार सौ मीटर तक एसयूवी चला सकता है?
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तीन बार रौंदा और सिपाहियों के शरीर पर खरोंच तक नहीं
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Lucknow Murder Case
तीन बार सिपाहियों को विवेक ने रौंदा था। लेकिन दोनों सिपाहियों को खरोंच तक नहीं आई। दोनों अगर गंभीर रूप से घायल थे तो घटना के बाद दोनों थाने कैसे पहुंचे? घायल होने के बावजूद बिना किसी तकलीफ के अफसरों को पूरा वाकया कैसे सुनाते रहे? इस दौरान एक कमरे से दूसरे कमरे आते-जाते रहे।
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झूठ पर झूठ: सिपाही कह रहा हमने भागते हुए एसयूवी सवार को मारी गोली
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विवेक तिवारी हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
आरोपी सिपाहियों के मुताबिक मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास एसयूवी सवार विवेक ने उनको रौंद दिया। सिपाही प्रशांत केमुताबिक विवेक की एसयूवी में बाइक फंस गई। उसने बैक कर भागने का प्रयास किया। जब वह उठ रहा था तो विवेक ने उसे दो बार और रौंदने का प्रयास किया। जब उसे अपनी जान को खतरा लगा तो सर्विस पिस्टल निकालकर गोली मार दी।
दो खतरनाक मोड़, सिर में गोली लगने के बाद कैसे चलाता रहा एसयूवी
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विवेक तिवारी हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
घटनास्थल बताता है कि जहां पुलिसकर्मियों को रौंदा गया वहां से और जहां एसयूवी अंडरपास के दीवार से टकराई उसके बीच 400 मीटर की दूरी है। इस दूरी के बीच दो खतरनाक मोड़ हैं। अगर पुलिस की थ्योरी मान भी लें तो साफ है कि सिर में गोली लगने के बावजूद विवेक इस स्थिति में था कि एसयूवी पर उसने नियंत्रण नहीं खोया!
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आखिर एसएसपी को 8 घंटे बाद क्यों याद आया सिपाही घायल हैं
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विवेक तिवारी हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
अगर सिपाही घायल थे तो एसएसपी कलानिधि नैथानी को क्यों आठ घंटे बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की याद आई? सुबह 9 बजे अफसरों को इतनी देर बाद क्यों याद आया कि सिपाहियों को विवेक ने एसयूवी से रौंदा था और वे गंभीर रूप से घायल हैं।
साफ है, मातहतों को बचाने की पटकथा पुलिस अफसरों के सामने तैयार हुई
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विवेक तिवारी
- फोटो : amar ujala
तस्वीरों में देख सकते हैं कि आरोपी सिपाही थाने में एकदम ठीक-ठाक चल रहे हैं और बाद में लोहिया अस्पताल ले जाया जाता है। कुछ देर पहले तक गोमतीनगर थाने में पैदल चलने वाले आरोपी सिपाहियों को अस्पताल में जीप से उतारने के लिए दो-दो सिपाही लगाए जाते हैं। उन्हें अस्पताल में उतारकर गोद में लेकर अस्पताल के अंदर ले जाया जाता है। साफ है कि एसएसपी कलानिधि नैथानी के सामने आरोपी सिपाहियों को बचाने की पूरी पटकथा रची गई और बाद में उसे अमलीजामा पहनाया गया।