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विवेक तिवारी शूटआउट: पत्नी की आंखें सूख गईं, लेकिन अफसरों ने पार कीं बेशर्मी की हदें

Sun, 30 Sep 2018 12:59 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
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विवेक तिवारी - फोटो : amar ujala
एपल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी के खून से सनी खाकी के दाग छिपाने को राजधानी पुलिस ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दीं। सदमे से विवेक की पत्नी व मासूम बेटी समेत पूरा परिवार गम और गुस्से में डूबा रहा, लेकिन अफसर इतने बेशर्म कि दोषी सिपाहियों पर कार्रवाई के बजाय बचाव की स्क्रिप्ट लिखते रहे। चरित्र हनन से लेकर आत्मरक्षा में गोली चलाने तक की कहानियां गढ़ डालीं। ये सब आला अफसरों की मौजूदगी में होता रहा। आखिरकार लोगों के आक्रोश के बाद सरकार सख्त हुई तो आला अफसरों को मजबूरी में सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी।
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विवेक तिवारी हत्याकांड - फोटो : amar ujala
पुलिस ने विवेक का चरित्र हनन करते हुए कहा कि वह कार में  महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में थे, जिसे पुलिसकर्मियों ने देख लिया। ऐसा कोई आम आदमी नहीं बल्कि पुलिस के अफसर कर रहे थे। सवाल उठा कि आपत्तिजनक हालत में किसी को पुलिस देख भी ले तो क्या गोली मार देगी? फिर इस स्क्रिप्ट को आगे बढ़ाया गया। अब इसमें जोड़ा गया कि सेल्फ डिफेंस में गोली चलाई। सिपाहियों ने विवेक को रोकने की कोशिश की तो वह कुचलते हुए भागने लगे...इसलिए आत्मरक्षा में चलाई गोली। कुचलने के साथ ही यह जोड़ा गया कि ऐसा तीन बार किया गया।
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विवेक तिवारी - फोटो : amar ujala
गम और आक्रोश में डूबी विवेक की पत्नी कल्पना का कहना है कि घटनास्थल पहुंचते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी समेत सभी पुलिस अफसर लीपापोती में जुट गए। उन्होंने पति के हत्या के आरोपी सिपाहियों को बचाने की कोशिश शुरू कर दी। आधी रात को मौके पर कोई भी नहीं था, इसलिए पुलिस के पास झूठ को सच और सच को झूठ बनाने का पूरा वक्त था। खून से लथपथ विवेक को अस्पताल पहुंचाने के बाद अधिकारी घटनास्थल पहुंचे और पुलिसकर्मियों को हत्या के आरोप व महकमे को फजीहत से बचाने के दांव-पेंच आजमाने शुरू किए। सबसे पहले विवेक की हत्या को हादसे का रूप देने की कोशिश की गई, क्यों?

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विवेक तिवारी - फोटो : amar ujala
कल्पना ने बताया कि एसएसपी ने कहा था कि  उनके पास परिवारीजनों से संपर्क करने के लिए कोई नंबर या जरिया नहीं था, इसलिए कार के नंबर के आधार पर जानकारी लेकर परिवार से संपर्क किया गया। कल्पना ने इस बात को सरासर झूठ है। विवेक का आईफोन उनकी कार में ही था। वह लगातार उन्हें कॉल कर रही थीं। पुलिस ने कॉल क्यों नहीं रिसीव किया। कार में मौजूद विवेक की पूर्व सहकर्मी भी पूरे परिवार को अच्छी तरह से जानती थी। पुलिस ने उससे मोबाइल नंबर लेकर भी परिवारीजनों से संपर्क करने की जरूरत नहीं समझी? साफ है कि पुलिस पूरा मामला रफा-दफा करने में जुटी थी। कल्पना का आरोप है कि दो घंटे तक पुलिस अधिकारी सिर्फ साजिश रचते रहे।  पौने चार बजे के आसपास किसी ने कॉल रिसीव की और बताया कि विवेक का एक्सीडेंट हो गया है और वह लोहिया अस्पताल में हैं।
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विवेक तिवारी हत्याकांड - फोटो : amar ujala
एफआईआर को लेकर भी पत्नी ने सवाल उठाए। पत्नी का कहना है कि दोपहर दो बजे तक  परिवार के सदस्यों को यह पता ही नहीं था कि हत्या की एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है। पुलिस आखिर ये बात क्यों छिपाती रही। हमें पता चला है मनमाफिक तहरीर लिखवाई पुलिस ने।  एफआईआर दर्ज के लिए तहरीर बोल-बोलकर लिखाई गई। इसमें विवेक को सीधे गोली मारने का जिक्र ही नहीं कराया। उन्होंने महिला सहकर्मी से लिखवाया कि वह विवेक तिवारी के साथ सीएमएस गोमतीनगर विस्तार के पास गाड़ी में बैठी थी, तभी सामने से दो पुलिसवाले आ गए। हमने उनसे बचकर निकलने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हमे रोकने की कोशिश की। उसके बाद अचानक से मुझे ऐसा लगा कि गोली चली। हमने वहां से गाड़ी आगे बढ़ाई। आगे हमारी गाड़ी अंडरपास की दीवार से टकराई और विवेक के सिर से काफी खून बहने लगा। मैंने सबसे मदद लेने की कोशिश की। थोड़ी देर में पुलिस आई, जिसने हमें हॉस्पिटल पहुंचाया।
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LUCKNOW VIVEK APPLE - फोटो : self
निढाल कल्पना ने मीडियाकर्मियों से हाथ जोड़कर कहा कि मेरे पति का कोई दोष नहीं था। पुलिस ने किसलिए उन्हें गोली मार दी। बगल में बैठी बेटी शिवी को देखकर वह फूट पड़ीं। उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोलीं, अब इन बच्चों को कैसे पालूंगी। बर्बाद कर दिया सब कुछ। बच्चे लेकर कहां जाऊं मैं? मुझे इंसाफ दिलाइए... एक बेकुसूर आदमी मारा गया है। रात डेढ़ बजे उनको कॉल की तो बताया था आधे घंटे में घर आ रहा हूं। आधे घंटे बीते तो फिर से कॉल की। रोते हुए...किसी ने कॉल नहीं रिसीव हुई। कुछ-कुछ देर बाद फोन करती रही। ‘मुझे क्या पता था कि पति की पुलिसवालों ने गोली मारकर हत्या कर दी है।’ बस आंखों से आंसू.... पौने चार बजे लोहिया अस्पताल के किसी कर्मचारी ने कॉल रिसीव की। बताया गया हादसा हुआ है।
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