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हिंसा की आग में जला बहराइच: शोरूम, अस्पताल और घर फूंके, हालात को नियंत्रित करने में पुलिस दिखी नाकाम, तस्वीरें

Tue, 15 Oct 2024 06:26 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच
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- फोटो : amar ujala
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान रविवार शाम हुई हिंसा और युवक रामगोपाल मिश्रा की हत्या के बाद सोमवार को बहराइच हिंसा की आग में जल उठा। आक्रोशित हजारों की भीड़ शव लेकर महसी तहसील पहुंची और महराजगंज जाने वाली सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। भीड़ का एक हिस्सा लाठी-डंडे लेकर कस्बे में घुस गया। बाइक के दो शोरूम, एक अस्पताल को आग के हवाले कर दिया। दूसरे समुदाय के गांव में जाकर दो घरों में भी आग लगा दी और पथराव किया।

डीएम, एसपी समेत आसपास के जिलों की फोर्स पहुंची। पीएसी के जवान भी पहुंचे लेकिन दोपहर तक हालात काबू नहीं कर पाए। इसके बाद एडीजी एलओ व एसटीएफ चीफ अमिताभ यश ने मोर्चा संभाला। आंसू गैस के गोले दागे, लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा। हिंसा और आगजनी के पीछे पुलिस की बड़ी नाकामी उजागर हुई है।
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मौके पर मौजूद पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला। - फोटो : amar ujala
महराजगंज कस्बे में रविवार को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान गाना बजाने को लेकर दूसरे समुदाय ने आपत्ति जताई थी। इसी को लेकर विवाद शुरू हुआ था। कुछ ही देर में झड़प शुरू हो गई। विसर्जन में शामिल 24 वर्षीय रामगोपाल मिश्रा को दूसरे समुदाय के लोग घर में खींच ले गए। बर्बरता के बाद उन्हें गोली मार दी थी। बचाने में राजन समेत 12 से अधिक लोग घायल हो गए थे, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई।
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मृतक का शव ले जाते समय उमड़ी भीड़ व गांव में तैनात पुलिसकर्मी। - फोटो : amar ujala
सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे पोस्टमार्टम के बाद रामगोपाल का शव घर पहुंचाया गया। अंतिम यात्रा में 5-6 हजार लोग शामिल हुए। भीड़ आक्रोश से भरी थी। लाठी-डंडों से लैसे भीड़ शव लेकर सीधे महसी तहसील पहुंची, जहां सड़क जामकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। यहां से भीड़ दो हिस्सों में बंट गई। करीब दो हजार लोग कस्बे और कबड़ियनपुरवा में घुस गए, जहां तोड़फोड और आगजनी की।

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मोर्चा संभाले जिलाधिकारी मोनिका रानी - फोटो : amar ujala
काबू नहीं कर सकी पुलिस
रविवार को हुई हिंसा के बाद ही इलाके में तनाव था। डीएम और एसपी समेत सभी वरिष्ठ अधिकारी देर रात मौके पर पहुंचे थे। रामगोपाल के घर भी भारी फोर्स की तैनाती कर दी गई लेकिन सोमवार को जब भीड़ लाठी-डंडों से लैस होकर आगे बढ़ी तो पुलिस उनको काबू नहीं कर सकी। भीड़ बवाल और आगजनी करती रही और पुलिसकर्मी इधर उधर भागते रहे। कुछ घंटे तक हालात बेकाबू रहे। पूरा इलाका आक्रोशित भीड़ ने अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस की और कंपनियां जब पहुंचीं, उच्चाधिकारी आए तब कुछ बवाल शांत हो सका। हालांकि, इसके बाद भी पूरे जिले में छिटपुट हिंसा जारी रही।
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उपद्रवियों को खदेड़ते अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश। - फोटो : amar ujala
अमिताभ यश ने संभाला मोर्चा, पिस्टल ने उपद्रवियों को दौड़ाया
मामला बिगड़ता देख एडीजी लॉ एंड ऑर्डर व एसटीएफ एडीजी अमिताभ यश भी सोमवार दोपहर में बहराइच पहुंचे। उपद्रवियों का बवाल देखकर वह खुद हाथ में पिस्टल लेकर सड़क पर उतरे। उन्हें अकेले ही दौड़ा लिया। हालांकि, इसके पहले उपद्रवियों ने कई वाहनों में तोड़फोड़ की। इस बीच जब सीधी पिस्टल तानकर अमिताभ दौड़े और एक राउंड फायरिंग की तब उपद्रवी पीछे हटे।
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- फोटो : amar ujala
जहां जो मिला उसे फूंक दिया
भीड़ से पुलिस का नियंत्रण खत्म हो चुका था। इसलिए दूसरे समुदाय का जो भी कुछ मिला उसको तोड़ दिया या फिर आग के हवाले कर दिया। भीड़ बदले की आग में उत्पात मचाती रही। पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़कर उनको खदेड़ रही थी लेकिन लोग तितर-बितर होने के बाद फिर जुट जा रहे थे। महराजगंज में टीवीएस और हीरो के शोरूम को भी जला दिया।
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- फोटो : amar ujala
एसपी ग्रामीण को फटकारा
एसपी ग्रामीण पवित्र मोहन त्रिपाठी भी मौके पर मौजूद रहे। एडीजी एलओ अमिताभ यश ने जब उनको देखा तो पता चला कि एसपी बिना असलहे के हैं। इस पर एडीजी ने उनको जमकर फटकारा और कहा कि इतनी बड़ी वारदात के दौरान इस तरह का रवैया है।
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- फोटो : amar ujala
दंगा भड़काने में 30 से अधिक उपद्रवी हिरासत में
मामले में अब्दुल हमीद, रिंकू उर्फ सरफराज, फहीम, राजा उर्फ साहिर खान, ननकऊ, मारुफ अली व अन्य अज्ञात पर हत्या समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस कप्तान का कहना है कि 30 से अधिक लोग हिरासत में लिए गए हैं। वीडियो फुटेज से उपद्रवियों की पहचान कर उनकी धरपकड़ के प्रयास जारी हैं।
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