यही नहीं, कुछ उपद्रवी तत्वों ने शव छीनने का भी प्रयास किया था। शव के हाथरस पहुंचने में रात के लगभग 12.30 बज चुके थे। गांव और गांव के बाहर जमा कुछ असामाजिक तत्व पूरी तरीके से हिंसा पर आमादा थे। इस बीच, पीड़िता के शव की हालत बिगड़ती जा रही थी। परिस्थितियों को देखते हुए मैंने वरिष्ठ अफसरों से सलाह करके पीड़िता के परिवार को विश्वास में लेकर रात्रि में ही दाह संस्कार करने का निर्णय लिया। एक डीएम के रूप में मौके की नजाकत व कानून-व्यवस्था की दृष्टि से मैंने यह फैसला लिया।