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Hathras Case: पीड़ित परिवार ने डीएम पर लगाए गंभीर आरोप, केस यूपी से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की

Wed, 14 Oct 2020 09:53 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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पीड़ित परिवार की वकील सीमा कुशवाहा। - फोटो : amar ujala
Hathras Rape Case: हाथरस कांड में पीड़िता के परिवार ने कोर्ट में जिले के डीएम पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों ने कहा कि बिटिया के अंतिम संस्कार के लिए हमारी कोई अनुमति नहीं ली गई। वहीं, पीड़ित परिवार की वकील सीमा कुशवाहा ने कहा कि परिवार ने केस यूपी से बाहर स्थानांतरित करने और सीबीआई रिपोर्ट को गोपनीय रखे जाने की मांग की है।



दिल्ली की निर्भया कांड की वकील रहीं सीमा ने कहा कि पीड़ित परिवार की मांग है कि केस को दिल्ली या फिर मुंबई स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने बताया कि परिवार ने कहा है कि पुलिस ने शुरू से ही सही जांच नहीं की। हमें परेशान किया। हमारी कोई मदद नहीं की थी। शुरू में तो एफआईआर तक नहीं लिखी।
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- फोटो : अमर उजाला
बेटी का अंतिम संस्कार भी बिना हमारी सहमति के रात में कर दिया। उसके अंतिम संस्कार में भी हमें शामिल नहीं किया। हमें तो पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं। डीएम ने भी परिवार पर अनुचित दबाव बनाया। इसके साथ ही मामले के पूरी तरह से समाप्त होने तक परिवार को कड़ी सुरक्षा में रखने की मांग की है।
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कोर्ट में जाते हुए पीड़िता के परिजन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
दरअसल, हाथरस में दुष्कर्म पीड़िता का रात में अंतिम संस्कार कराने पर सोमवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अफसरों से इसका जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने डीएम समेत अन्य अफसरों को इस मुद्दे पर आड़े हाथ लिया। डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने अदालत को बताया कि जिले में कानून-व्यवस्था को नियंत्रण में रखने के लिए रात में अंतिम संस्कार कराने का निर्णय किया गया। इसके लिए सरकार का कोई दबाव नहीं था।

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- फोटो : अमर उजाला
न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति राजन राय की खंडपीठ ने पीड़िता का रातोंरात अंतिम संस्कार कराने के मामले में सोमवार को सवा दो बजे से करीब दो घंटे तक सुनवाई की। पीड़िता के परिवार के पांच लोगों के साथ ही यूपी पुलिस के मुखिया सहित तलब शीर्ष अधिकारियों तथा हाथरस के डीएम व एसपी का पक्ष जाना।
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- फोटो : अमर उजाला
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने जवाबी हलफनामा पेश कर पक्ष रखा। डीपीजी हितेश चंद्र अवस्थी, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने कार्रवाई से अवगत कराया। मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को होगी।
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- फोटो : अमर उजाला
परिवार को विश्वास में लिया गया था
हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने कोर्ट को बताया कि 29 सितंबर की रात में अंतिम संस्कार कराने का निर्णय पीड़िता के परिवार को विश्वास में लेकर किया गया। उन्होंने बताया कि दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की सुबह मौत हो गई थी। करीब 1000 लोगों ने अस्पताल परिसर में ही हंगामा किया, जिसके चलते शव को पोस्टमार्टम के बाद हाथरस ले जाने के लिए बाहर लाने में ही लगभग 10 घंटे का समय लग गया।
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- फोटो : अमर उजाला
यही नहीं, कुछ उपद्रवी तत्वों ने शव छीनने का भी प्रयास किया था। शव के हाथरस पहुंचने में रात के लगभग 12.30 बज चुके थे। गांव और गांव के बाहर जमा कुछ असामाजिक तत्व पूरी तरीके से हिंसा पर आमादा थे। इस बीच, पीड़िता के शव की हालत बिगड़ती जा रही थी। परिस्थितियों को देखते हुए मैंने वरिष्ठ अफसरों से सलाह करके पीड़िता के परिवार को विश्वास में लेकर रात्रि में ही दाह संस्कार करने का निर्णय लिया। एक डीएम के रूप में मौके की नजाकत व कानून-व्यवस्था की दृष्टि से मैंने यह फैसला लिया।

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- फोटो : अमर उजाला
ऐसी परिस्थितियों के लिए सरकार को तैयार करना होगा दिशा-निर्देश
अदालत ने अफसरों से सवाल किया कि ऐसा क्या हो गया कि रात में अंतिम संस्कार कराना पड़ा? डीएम ने कहा कि कानून-व्यवस्था के चलते ऐसा करना पड़ा।
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- फोटो : अमर उजाला
इस पर कोर्ट ने कहा कि हाथरस जैसी परिस्थितियों में शवों के दाह संस्कार के लिए यूपी सरकार को प्रकिया संबंधी दिशा निर्देश बनाना होगा। इस पर अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कहा कि एसओपी बनाकर इसकी जानकारी कोर्ट को दी जाएगी।
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