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बुखार से तड़पते बच्चे को लेकर भटकते रहे परिजन, पैसे नहीं थे तो एंबुलेंस वाले भी भागे

Fri, 23 Sep 2016 12:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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बीमार सोनू को लेकर भटकते पर‌िजन - फोटो : amar ujala
डेंगू और बुखार के कहर से शहर से लेकर गांव तक कोहराम मचा है। बुखार से बच्चे की हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने लखनऊ रेफर किया लेकिन यहां डॉक्टर वेंटिलेटर की जरूरत बताकर पिता और दादा को अस्पतालों के चक्कर कटवाते रहे। 
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एंबुलेंस
रुपये नहीं होने के कारण एंबुलेंस वाले छोड़कर भाग गए। जैसे-तैसे परिवारीजन बलरामपुर अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने वेंटिलेटर न होने की बात कहकर ट्रॉमा सेंटर भेज दिया। ट्रॉमा में बच्चे को भर्ती तो कर लिया गया लेकिन वेंटिलेटर नहीं मिला। 
 
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बच्चे को लेकर भटकते पर‌िजन
बलरामपुर निवासी रामाधार के नाती मोनू (10) को बुखार है। रामाधार ने बताया कि जिला अस्पताल से मोनू को लखनऊ रेफर किया गया। सुबह सात बजे लोहिया अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। केजीएमयू पहुंचे तो वेंटिलेटर खाली न होने की बात कहकर वापस कर दिया गया। बाहर निकले तो प्राइवेट एंबुलेंस के दलालों ने निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी। 

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बच्चे को लेकर भटकते पर‌िजन - फोटो : amar ujala
यहां से परिवारीजन दोपहर तीन बजे बलरामपुर अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने वेंटिलेटर न होने की बात कहकर फिर ट्रॉमा जाने की सलाह दी, लेकिन नियमानुसार रेफर नहीं किया। मोनू की बिगड़ती हालत और अस्पतालों की दौड़ के बाद परिवारीजनों की हिम्मत जवाब दे गई तो इमरजेंसी में बिलख पड़े। 
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एंबुलेंस - फोटो : amar ujala
इसके बाद डॉक्टरों ने आनन-फानन में रेफर स्लिप बनाकर अस्पताल की एंबुलेंस से भेज दिया। देर रात तक बच्चा कैजुअलिटी में भर्ती रहा लेकिन वेंटिलेटर नहीं मिल सका। उधर, परिवारीजनों ने बताया कि उन्हें फोन करने के बाद 108 एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली। 
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बच्चे को लेकर भटकते पर‌िजन
लोहिया अस्पताल के सीएमएस डॉ. ओंकार यादव का कहना है कि वेंटिलेटर यूनिट फुल है। सिविल अस्पताल के एमएस डॉ. आशुतोष दुबे का कहना है कि अस्पाताल में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजीव लोचन का कहना है कि अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट की सुविधा नहीं है। बच्चे को ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया। 
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