फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गर्भवती महिलाएं रखें ध्यान, नहीं तो बच्चे में हो सकता है गंभीर बीमारी का खतरा

Thu, 24 May 2018 02:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 5
डेमो - फोटो : डेमो
गर्भाशय के संक्रमण से बच्चे को मानसिक रोग का खतरा रहता है।  वहीं किशोरावस्था में अचानक व्यवहार बदल जाए तो बिना देरी किए मानसिक रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। यह मानसिक रोग स्किजोफ्रेनिया का लक्षण हो सकता है।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
- फोटो : डेमो
इस बीमारी में रात में नींद न आना, उम्मीद के विपरीत बदलाव आना और सोचने-समझने की क्षमता खो देने जैसी समस्या होती है। यह जानकारी केजीएमयू के जीरियाट्रिक मेंटल हेल्थ के विभागाध्यक्ष और स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के सचिव प्रो. एससी तिवारी ने विश्व स्किजोफ्रेनिया-डे की पूर्व संध्या पर बुधवार को दी। उन्होंने बताया कि यह बीमारी 13 से 14 साल की उम्र से ही हो सकती है। 40 की उम्र के बाद यह बीमारी साइकोसिस के रूप में जानी जाती है। 
विज्ञापन

3 of 5
डाॅ एससी तिवारी - फोटो : amarujala
अनुवांशिक नहीं है यह बीमारी : डॉ. एससी तिवारी ने बताया कि किसी के घर में कोई मानसिक रूप से बीमार है तो परिवार के अन्य लोगों में भी यह बीमारी होने की बात कही जाती है। लेकिन यह बीमारी किसी भी तरह से अनुवांशिक नहीं है। 

4 of 5
demo pic
प्रो. एससी तिवारी ने बताया कि गर्भावस्था में गर्भाशय के संक्रमण, गर्भवती को लगातार बुखार या किसी भी तरह के वायरल इन्फेक्शन से भी होने वाले शिशु को मानसिक रोग का खतरा होता है। इसके अलावा गर्भ में या प्रसव के समय शिशु को चोट लगने से भी आगे जाकर उसे स्किजोफ्रेनिया की आशंका होती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
- फोटो : डेमो
स्किजोफ्रेनिया एक तरह की मानसिक बीमारी है। इसमें व्यक्ति को किस समय क्या करना है? कैसे करना चाहिए? दिमाग की सोचने-समझने की यह क्षमता कम हो जाती है। व्यक्ति अपने आस-पास हो रही घटनाओं को खुद से जोड़ नहीं पाता। वह उलूल-जुलूल बर्ताव करने लगता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल जनसंख्या के एक प्रतिशत लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं। भारत में भी एक से दो प्रतिशत लोग इस बीमारी की चपेट में है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें