ब्लाक प्रमुख चुनाव के नतीजा घोषित होने पर कैराना ब्लाक कार्यालय के बाहर कुछ लोगों ने तमंचों से जमकर फायरिंग की। इस दौरान मौसी के साथ ई रिक्शा से जा रहे बालक की गोली लगने से मौत हो गई। घटना पर गुस्साए लोगों ने बालक का शव सड़क पर रखकर पानीपत-खटीमा हाईवे जाम कर दिया।
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नेताओं के जश्न में मासूम की हत्या... पर जिम्मेदार कौन?
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रविवार अपराह्न करीब तीन बजे कैराना विकास खंड कार्यालय के बाहर दोनों ही प्रत्याशियों के समर्थकों की भीड़ जुटी हुई थी। मतगणना शुरू होने पर एक पक्ष के लोगों ने कई राउंड हवाई फायरिंग कर दी। फिर जब चुनाव परिणाम घोषित हुआ, तो दूसरे पक्ष ने हर्ष में फायरिंग की।
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इसी दौरान ई रिक्क्षा में अपनी मौसी के साथ जा रहे समी (8) पुत्र अहसान निवासी दरबार खुर्द के सीने में गोली लग गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
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जिसके बाद बालक का शव कांधला तिराहे पर रखकर पानीपत खटीमा हाईवे जाम कर दिया गया। लोगों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ गुस्सा बना हुआ था। उधर, जाम और प्रदर्शन की जानकारी होने पर बसपा नेता हाजी अनवर हसन, कंवर हसन भी मौके पर पहुंचे।
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इसके बाद क्षेत्रीय सपा विधायक चौधरी नाहिद हसन भी आ गए। बाद में मौके पर पहुंचे एसपी विजय भूषण और एएसपी अनिल कुमार झा ने लोगों को समझाने का प्रयास किया।
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बसपा नेता हाजी अनवर हसन और कंवर हसन ने अधिकारियों से कहा कि यह पुलिस के नकारेपन का उदाहरण है, क्योंकि पुलिस की मौजूदगी में अवैध हथियारों से हर्ष फायरिंग होती रही और पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे।
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ये तो सिर्फ एक बानगी भर है यूपी के नेता व उनके समर्थक चुनाव में हथियारों का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं। बलरामपुर के श्रीदत्त ब्लॉक से ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ रहे सपा प्रत्याशी फरीद खां व उनके समर्थकों पर विपक्षियों ने हमला कर दिया और उन पर तमंचे से फायर झोंक दी।
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ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन व जीत के बाद लोगों ने जमकर हथियारों का प्रदर्शन फायरिंग की। जिसके कारण पुलिस को खासा सतर्क रहना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर उस बच्चे की या इस तरह की हरकतों के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। प्रशासन को या फिर उन नेताओं को जिनकी शह पाकर उनके समर्थक कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं।
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हालांकि कैराना मामले में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कड़ी नाराजगी दिखाई। जिस पर हरकत में आए वरिष्ठ अफसरों ने कैराना के इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया।
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सिर्फ चुनाव ही नहीं मांगलिक कार्यक्रमों में भी हर्ष फायरिंग के कारण लोगों के घायल होने या मारे जाने की खबरें मिल ही जाती हैं। ऐसे में यही कहा जा सकत है कि इन पर जल्द ही प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।