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केजीएमयू में मरीजों को खिलाई जा रही सड़ी व बदबूदार सब्जियां, देखें- बदहाली की एक लाइव रिपोर्ट

Thu, 09 Aug 2018 12:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मरीजों को खिलाई जा रहीं सड़ी सब्जियां - फोटो : amarujala
केजीएमयू के शताब्दी फेज टू के बेसमेंट में रखीं सब्जियां देखने जब अमर उजाला रिपोर्टर पहुंचा तो दरवाजा खोलते ही बदबू आने लगी। कर्मचारी सड़ी व गली प्याज छुपाने की कोशिश करता है। कद्दू व लौकी की हालत ऐसी कि कोई बाजार से खरीदना नहीं चाहेगा। यानी मंडी की छंटी सब्जियां मरीजों के लिए रखी गईं हैं। केजीएमयू सीएमएस तक का कहना है कि ऐसी सब्जियां खाने से डॉक्टर की मेहनत बेकार चली जाएगी। पेश है बदहाली की लाइव रिपोर्ट...
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सड़ी सब्जी - फोटो : amarujala
जिस केजीएमयू के डॉक्टर मरीजों को ताजी-हरी सब्जियां खिलाने की सलाह देते हैं, उसी संस्थान में गंभीर मरीजों को सड़ी हुईं सब्जियां पका कर दी जा रही हैं। मरीजों की लगातार शिकायत के बाद कैंटीन में आने वाली सब्जियों की पड़ताल की गई तो स्थिति चौंकाने वाली मिली। यहां सड़ा हुआ प्याज, फफूंद लगी भिंडी व करेला मिला। लौकी व कद्दू की हालत को एकदम खराब थी, लेकिन यही सड़ी सब्जियां शताब्दी अस्पताल की कैंटीन में पकाई जा रही हैं और मरीजों को परोसी जा रही है।
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सड़ी सब्जियां - फोटो : amarujala
यह हालत तब है, जब खाना पकने के बाद उसे चखने की व्यवस्था बनाई गई है। लौकी व कद्दू कैंसर का मरीज बना सकती है। विशेषज्ञ डॉक्टर की मानें तो सड़ी सब्जियां खाने से कैंसर हो सकता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है और पहले से बीमार मरीज की जान भी जा सकती है। स्टोर रूम के दूसरे हिस्से में एक टोकरी में भिंडी तो दूसरी में करेला रखा हुआ है। इन पर पूरी तरह से फफूंद लगी हुई है। कर्मचारी बताता है कि बारिश में ले आते भिंडी भीग गई थी। इससे फफूंद लग गई है, लेकिन वह ये भी कहता है कि जो मिलेगा वही तो पकाएंगे।

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सड़ी सब्जी - फोटो : amarujala
स्टोर में कद्दू व लौकी भरपूर मात्रा में रखी हुई हैं। इसे पहली ही निगाह में देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां आई लौकी व कद्दू वही हैं, जिसे आम आदमी खरीदना नहीं चाहता और विक्रेता छांट कर अलग कर देते हैं।
बड़ा सवाल
यह दीगर है कि सीएमएस कड़ी कार्रवाई की बात कह रहे, पर सवाल यह है कि क्या कैंटीन की निगरानी नहीं होती? यदि होती है तो आज तक ये सच छिपा कैसे रहा। 
 
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सब्जी काटते हुए - फोटो : amarujala
दरवाजा बंद कर काट रहे थे सब्जियां 
शताब्दी फेज टू के बेसमेंट में कैंटीन का स्टोर रूम बनाया गया है। बाजार से आने वाली सब्जियां व अन्य सामान यहीं रखे जाते हैं। बेसमेंट में पानी आने से कुछ सामान भीग भी गया है। कर्मचारी दरवाजा बंद करके सब्जियां काट रहे थे। दरवाजा खोलने के लिए कहने पर पहले साहब की अनुमति लेने का निवेदन करते हैं। कड़ाई से बोलने पर कर्मचारी दरवाजा खोलता है। अंदर का नजारा देखते ही ऊबकाई आती है। सड़ा प्याज व कद्दू की दुर्गंध बेचैन कर देती है। यहां कर्मचारी सड़ी  सब्जियां काटता नजर आता है। पूछने पर बताता है कि हर दूसरे व तीसरे दिन मंडी से सब्जी की खेप आती है। आज ही नई खेप आई है। बारिश से ज्यादातर सामान सड़ा हुआ मिल गया है। यही दो दिन चलेंगी।
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प्याज - फोटो : amarujala
सड़ा प्याज को छुपाने की कोशिश
दरवाजा खुलने के बाद सड़ा प्याज से भरी टोकरी दिखती है। इसी प्याज को छिलकर दूसरी टोकरी में रखा गया है। हर प्याज की आधी से ज्यादा परत सड़ी हुई है, लेकिन इसी प्याज से बनी सब्जी मरीजों को परोसी जाएगी। वहां मौजूद कर्मचारी खुद स्वीकार करता है कि जो मिलेगा, उसी से तो खाना बनेगा। अच्छी प्याज क्यों नहीं खरीदी जा रही है, यह पूछने पर जवाब आता है, ‘यह तो साहब बताएंगे।’
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सड़ी सब्जी - फोटो : amarujala
मरीज की जान ले सकती हैं सड़ी सब्जियां
सड़ी, फफूंदी और दागदार सब्जियों सेहत के लिए कितना नुकसानदायक है, यह जानने के लिए केजीएमयू के नर्सिंग विभाग में कार्यरत क्लीनिकल इंस्ट्रक्टर डॉ. शैली से बातचीत की गई। सब्जियों की तस्वीरें देखने के बाद उन्होंने क्या कहा, आप भी पढ़िए...
तेजाबी लग रहे हैं लौकी व कद्दू  
लौकी और कद्दू तेजाबी लग रहे हैं। यह भी संभव है कि वे गंदे पानी से तैयार किए गए हों। ये लौकियां खाने से कैंसर भी हो सकता है। 

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सड़ी भिंडी - फोटो : amarujala
पकाने के बाद भी रहेगा फफूंद का असर 
भिंडी व करेला व प्याज में फफूंद ज्यादा है। इनका असर पकाने के बाद भी रहेगा। इन सब्जियों को पकाकर खाने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। रोज खाने से होंगी पेट की बीमारियां 
एक-दो दिन इनका असर नहीं होता, लेकिन लगातार सड़ी सब्जियां खाने से पेट संबंधी बीमारियाें का खतरा रहता है। बीमार व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। ऐसे में जान भी जा सकती है।

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सड़ी सब्जी - फोटो : amarujala
निगरानी कमेटी को नहीं पता
मरीजों के खाने की क्वालिटी जांचने के लिए डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव के नेतृत्व में केजीएमयू की किचन निगरानी कमेटी बनी है। सड़ी सब्जी पर उनका पक्ष जानने के लिए कई बार कॉल की गई, लेकिन उन्होंने नहीं उठाया। कमेटी के दूसरे सदस्य डॉ. मोहम्मद परवेज खान से बात की गई तो उन्होंने चेकिंग की जिम्मेदारी न्यूट्रीशियन पर डाल दी। कमेटी क्यों बनी है, इसके जवाब में कहा कि काफी दिन से उधर गए नहीं। आज ही दिखवाते हैं। क्वालिटी से समझौता नहीं होना चाहिए।
दो न्यूट्रीशियनिस्ट पर जिम्मा
केजीएमयू में मरीजों के  खाने की गुणवत्ता की निगरानी के लिए सिर्फ दो न्यूट्रीशनिस्ट हैं। सूत्रों की मानें इसमें एक की ड्यूटी कई बार दूसरे काम में लगा दी जाती है। यहां करीब दो हजार मरीजों का खाना बनने का दावा किया जाता है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि दो न्यूट्रीशनिस्ट खाने की गुणवत्ता कितना परख सकती हैं।
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सड़ी सब्जी - फोटो : amarujala
सुधार नहीं हुआ तो बदलेंगे संचालक
निगरानी के लिए कमेटी बनी है। शताब्दी में घटिया सब्जी पकाए जाने की जानकारी नहीं है। रात में जाकर स्टोर चेक करवाते हैं। सड़ी हुई सब्जी मरीज की तबीयत सुधारने के बजाय और बिगाड़ देगी। घटिया खाने की वजह से डॉक्टरों की पूरी मेहनत बेकार चली जाएगी, इसलिए इस पर तत्काल अंकुश लगाया जाएगा। चेतावनी दी जा रही है। सुधार नहीं हुआ तो संचालक बदल दिया जाएगा। - प्रो. एसएन शंखवार, सीएमएस, केजीएमयू
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