यूपी आईएएस एसोसिएशन के ‘सर्विस-डिनर’ के दौरान अफसरों को एक से बढ़कर एक टाइटल से नवाजा गया। दिन में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की खरी-खरी और मुख्य सचिव राहुल भटनागर की सख्त समीक्षा के बाद डिनर के लिए अफसर एमबी क्लब में जुटे। यहां गीत-संगीत की महफिल सजी तो देर रात तक अधिकारियों के ठहाके गूंजते रहे।
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अधिकारियों की छवि के अनुरूप ही उन्हें टाइटल दिए गए। किसी को भी साधने में माहिर लखनऊ के जिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह के लिए टाइटल पेश किया गया- छलिया मेरा नाम, छलना मेरा काम, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सबको मेरा सलाम।
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अनुराग यादव सपा सरकार में जलवेदार अफसर माने जाते रहे हैं। वे डीएम लखनऊ और सचिव पीडब्ल्यूडी जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं, लेकिन इस समय खादी ग्रामोद्योग जैसे कम महत्व वाले महकमे के सचिव हैं। उनके लिए कहा गया- अरे फिरते थे जो बड़े ही सिकंदर बने हुए, बैठे हैं उनके दर पर कबूतर बने हुए।
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प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल दुर्घटना में चोट खाने के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। उनके लिए साथियों ने दुआ की-सदा खुश रहे तू जफा करने वाले, दुआ कर रहे हैं दुआ करने वाले।
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अनिल सागर के लिए, ‘ए दिल आवारा चल-फिर वही दोबारा चल’ तो प्रमुख सचिव नियुक्ति सहित तमाम बड़े-बड़े ओहदे संभालने वाले केएस अटोरिया को ‘हमको ऐसा वैसा न समझो, हम बड़े काम की चीज...’ से नवाजा गया।
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1985 बैच के अफसर मुख्य सचिव वेतनमान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका दर्द कुछ यूं झलका- इंतहा हो गई इंतजार की..। 1989 बैच के आईएएस अनिल कुमार के लिए साथियों ने पढ़ा-दौड़ अकेला, दौड़ अकेला, दौड़ अकेला, तेरा मेला पीछे छूटा राही दौड़ अकेला। इसी तरह आजमगढ़ के डीएम सुहास एलवाई को टाइटल मिला-ढल गया दिन, हो गई शाम, जाने दो, जाना है...।
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इस साल सूबे में मुख्य सचिव के पद को लेकर जो उठापटक देखने को मिले, टाइटल में उसकी भी झलक नजर आई। मुख्य सचिव के ओहदे तक पहुंचते-पहुंचते रह गए वरिष्ठतम आईएएस अधिकारी प्रवीर कुमार के लिए कहा गया-वक्त ने किया क्या हंसी सितम। तो कुछ दिनों तक ही मुख्य सचिव की कुर्सी पर रह पाए दीपक सिंघल के लिए कहा गया-‘हम रहे न हम, तुम रहे न तुम ’।
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कृषि उत्पादन आयुक्त प्रदीप भटनागर मौजूदा मुख्य सचिव राहुल भटनागर से वरिष्ठ हैं, लेकिन वह इस दौड़ से बाहर ही रहे। उन्हें टाइटल दिया गया- भली-भली सी एक सूरत, भला सा एक नाम। तो बड़ों-बड़ों को पछाड़कर मुख्य सचिव की कुर्सी पाने वाले राहुल भटनागर को ‘मुझको पहचान तो, मैं हूं डॉन’ टाइटल दिया गया।
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लीना जौहरी, अनीता मेश्राम और कामिनी रतन चौहान अपने बच्चों की पढ़ाई व अन्य पारिवारिक दायित्व के लिए इन दिनों अवकाश पर हैं। एक ही गाने की लाइनें इन अफसरों के लिए पेश की गईं -लीना जौहरी के लिए, तू कितनी अच्छी है, अनीता मेश्राम के लिए, तू कितनी भोली है और कामिनी रतन चौहान के लिए हमारे लिए छुट्टी लेके, घर पर बैठी है... ओ मां...। खीरी में डीएम रहकर काफी चर्चा में आईं किंजल सिंह के लिए पेश किया गया-जंगल-जंगल बात चली है, पता चला है...।
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दूसरे काडर के कुछ अधिकारी सूबे में लंबे अर्से से अहम पदों पर टिके हुए हैं। यूपी काडर के अफसरों ने विशाल चौहान, अनूप यादव, जयश्री भोज व निधि केसरवानी के लिए पेश किया-ओ अतिथि तुम कब जाओगे, कोई तिथि तो बताओ।
सचिव संस्कृति हरिओम ने न जाने कितनों को यश भारती दिला दिया। वह खुद भी अच्छे गजल गायक हैं, लेकिन उन्हें यह सौभाग्य नहीं मिल सका। साथियों ने उनके लिए कहा-जाने वो कैसे लोग थे जिनको यश भारती मिला, हम तो बस बार-बार दिलाते ही रहे, पर हमको ही न मिला।