सीतापुर जिले के रेउसा थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह खेत में का काम कर रहे दो किसानों पर बाघ ने हमला कर जख्मी कर दिया। इसके बाद बघा खेत में जाकर छिप गया। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने उसे पकड़ने का प्रयास किया लेकिन असफल रहे। बाघ को काबू में करने के लिए लखनऊ जू और दुधवा नेशलन पार्क की टीमें भी पहुंचीं हैं।
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attack of tiger
- फोटो : amar ujala
रेउसा थाना क्षेत्र के ग्राम भवानीपुर निवासी अजय कुमार(25) शुक्रवार सुबह गांव के बाहर अपने खेत में गन्ने की फसल काटने गया था। जैसे ही अजय खेत में पहुंचा तभी वहां छिपे बैठे बाघ ने उस पर हमला कर गिया। अजय की चीख सुनते ही बगल के खेत में काम कर रहा इतिवारी लाल (35) मदद के लिए पहुंचा। इतने में बाघ ने इतिवारी पर भी हमला कर दिया।
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दोनों किसानों की चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग लाठी-डंडा लेकर हांका लगाते हुए दौड़े। इस पर बाघ गांव के लज्जाराम के गन्ने के खेत में जा छिपा। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी। इसके अलावा दोनों घायलों को सीएचसी लेकर पहुंचे।
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कुछ ही देर में डीएफओ डॉ. अनिरुद्ध पांडेय और एसडीएम लहरपुर पूर्णिमा सिंह, वन विभाग व पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। वन विभाग ने खेत की घेराबंदी करने के साथ ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा और लखनऊ तथा दुधवा से मदद मांगी।
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दोपहर तक लखनऊ से वर्ल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) और दुधवा नेशनल पार्क से रैपिड डिस्पोज, ट्रीट टाइगर प्रोजेक्ट की टीमें मौके पर पहुंच गईं। तीनों टीमें लगातार काबिंग कर बाघ को काबू में करने का प्रयास कर रही हैं।
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डीएफओ अनिरुद्ध पांडेय ने कहा कि ग्रामीणों ने तो बाघ देखने की बात कही है लेकिन ऎभी हम जब तक उसे पकड़ नहीं लेते तब तक ये नहीं कह सकते कि वह बाघ है या तेंदुआ। उसे पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पानी की तलाश में आबादी में पहुंचा तेंदुआ
बहराइच के ककरहा रेंज क्षेत्र में गुरुवार रात देर रात मधवापुर गांव के पास तेंदुए की गुर्राहट और दहाड़ से लोगों की नींद उड़ गई। समूह में ग्रामीण गांव के बाहर पहुंचे तो गांव से सटे बशीर फार्म में तेंदुए को देख लोग सहम गए। लोगों ने शोर मचाना शुरू किया। इस दौरान कुछ ग्रामीणों ने मशाल जला दिया। इसके बावजूद ४० मिनट तक तेंदुआ मौके पर जमा रहा। गनीमत यही रही कि शोर होने और मशाल जलने के चलते उसने हमला नहीं किया। इस दौरान रेंज कार्यालय ककरहा को सूचना दी गई। रात में वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र मौर्या टीम के साथ मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक तेंदुआ जंगल की ओर जा चुका था। पदचिह्नों से उसके मादा तेंदुआ होने की पुष्टि हुई। वन क्षेत्राधिकारी ने कहा कि हो सकता है तेंदुआ पानी की तलाश में यहां पहुंचा हो।