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मिसालः यहां मंदिर-मस्जिद है एक ही परिसर में, एक ही है दरवाजा

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कानपुर के टाटमिल चौराहे पर एक ही परिसर में मंदिर है और मस्जिद भी। दोनों का दरवाजा भी एक है। यहां आरती और अजान एक-दूसरे के सहयोग से होती है। इसे हिंदू मुस्लिम एकता की अद्भुत मिसाल कहते हैं।
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मिसालः यहां मंदिर-मस्जिद है एक ही परिसर में, एक ही है दरवाजा

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हिंदू और मुस्लिम दोनों मिलकर यहां सफाई करने से लेकर पूजा, इबादत में एक- दूसरे का सहयोग करते हैं। जुमे में मंदिर तक नवाज अदा की जाती है तो भंडारे के लिए मस्जिद से पानी भरा जाता है।
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टाटमिल चौराहे पर नयापुल से झकरकटी की तरफ एक ही परिसर में आगे की तरफ श्री शिव हनुमान मंदिर और उसके पीछे एक मीनार मस्जिद एवं मदरसा है। मस्जिद में जाने वाले भगवान के दर्शन करते हुए जाते-आते हैं।

मिसालः यहां मंदिर-मस्जिद है एक ही परिसर में, एक ही है दरवाजा

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इस मस्जिद के इमाम मोहम्मद हलीम फारुखी ने बताया कि करीब 75 साल पहले कुछ हिंदू और मुस्लिम भाई प्यार मोहब्बत से इसी स्थल पर एक साथ बैठते थे। उन्होंने ही भाईचारे के लिए यहां एक ही परिसर में अगल-बगल मंदिर और मस्जिद बनाई। तब से यहां भाईचारा कायम है।
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श्री शिव मंदिर के पुजारी शिवम ने बताया कि यहां हम मुस्लिम भाइयों के साथ मिलकर सफाई करते हैं। कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। शिवरात्रि पर्व से लेकर देवी जागरण तक में मौलवी से लेकर यहां आने वाले सभी मुस्लिम भाई बढ़ चढ़ कर सहयोग करते हैं। बकौल पुजारी ईश्वर अल्ला एक ही नाम है। यहां बजरंगबली और अली, मौला और भोला अगल-बगल हैं। फोटोः ओपी वाधवानी, कानपुर
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