लखनऊ में शनिवार को एक बार फिर से शिक्षकों और पुलिस के बीच संघर्ष के हालात बने। चूंकि शिक्षकों की संख्या कम थी इसलिए पुलिस ने उन्हें हंगामा नहीं करने दिया।
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पुलिस और शिक्षकों के बीच संघर्ष, हाथापाई की नौबत
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अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ के संयोजन में हुए इस धरने में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को अनुदान में लेने और इस व्यवस्था में काम कर रहे अध्यापकों को नियमित करने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि 26 दिसंबर 2013 और 10 फरवरी 2014 को सरकार ने ये वादा किया था कि वो इन शिक्षकों को नियमित करेगी।
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पुलिस और शिक्षकों के बीच संघर्ष, हाथापाई की नौबत
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धरना शुरू होने के कुछ देर बात ही शिक्षकों के इस समूह ने जीपीओ कैंपस से निकलकर मुख्यमंत्री आवास की तरफ कूच करने की कोशिश की।
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वैसे तो पुलिस धरना स्थल पर पहले से ही मौजूद थी लेकिन जैसे ही पुलिस को इस बात की भनक लगी कि शिक्षक कैंपस से निकलकर मुख्यमंत्री आवास की ओर से कूच करना चाहते हैं वैसे ही अचानक से वहां पुलिस के सिपाही बड़ी संख्या में आ गए।
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पुलिस और शिक्षकों के बीच संघर्ष, हाथापाई की नौबत
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यहां इतनी संख्या में पुलिस आ गई कि धरना दे रहे शिक्षक संख्या में उनसे भी कम हो गए। बाद में इन शिक्षकों को पुलिस ने फिर से ठकेलकर जीपीओ कैंपस के अंदर कर दिया।
शिक्षक आसानी से फिर से जीपीओ कैंपस में जाने के लिए तैयार नहीं थे। वह अपना ज्ञापन मुख्यमंत्री के पास तक पहुंचाना चाहते थे। इसी बात को लेकर पुलिस और शिक्षकों के बीच तीखी बहस और धक्का मुक्की भी हुई।