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क्लैट के शिखर पर चमके लखनऊ के सितारे, जानें सक्सेस मंत्रा, तस्वीरें

Tue, 24 May 2016 03:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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देश के प्रतिष्ठित 17 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए होने वाले कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) -2016 के रिजल्ट में लखनऊ के मेधावी एक बार फिर शिखर पर हैं। परीक्षा में लखनऊ के हर्ष श्रीवास्तव ने देशभर में 26वां स्थान हासिल किया तो किसलय द्विवेदी 28वें नंबर पर रहे। हर्ष और किसलय के साथ ही प्र्राची त्रिपाठी-107वीं रैंक, अवनी अग्रवाल 136वीं रैंक, अपूर्व सिंह 137वीं रैंक, कार्तिकेय सिंह 149वीं रैंक समेत काफी मेधावियों ने 500 के अंदर रैक लाने में सफलता पाई। पंजाब के राजीव गांधी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की ओर से हुई परीक्षा का रिजल्ट सोमवार को जारी कर दिया गया। मेधावियों ने अमर उजाला से हुई बातचीत में अपने अनुभव साझा किए। पेश है रिपोर्ट-
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पिता की प्रेरणा से हासिल की सफलता- हर्ष श्रीवास्तव (26वीं रैंक)

पापा जस्टिस राकेश श्रीवास्तव हमेशा से मेरे आदर्श हैं। उन्हीं की प्रेरणा से मैंने क्लैट दिया था। सफलता मिलने पर अच्छा लग रहा है। यह कहना है कि क्लैट में 26वीं रैंक लाने वाले हर्ष श्रीवास्तव का। हर्ष की मां सुधा श्रीवास्तव गृहिणी हैं। उनके अनुसार क्लैट में सफलता हासिल करने के लिए जरूरी है कि नियमित रूप से अखबार पढ़ा जाए। अंग्रेजी बहुत अच्छी करने की जरूरत है। जीके पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। इसके बाद सफलता न मिले ऐसा नहीं हो सकता। इस रैंक पर हर्ष को देश के सबसे अव्वल बंग्लौर नेशनल यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल जाएगा। (परिवार के साथ काली जैकेट में हर्ष।)

टिप्स- टाइम मैनेजमेट बनाएं, नियमित रूप से अखबार पढ़ें और सामान्य ज्ञान बेहतर करने की कोशिश करें। परीक्षा में सबसे ज्यादा अहम रोल यही अदा करता है।
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जेईई में माइनस दो और क्लैट में 28वीं रैंक- किसलय द्विवेदी (28वीं रैंक)

जेईई मेन की परीक्षा में मैथ्स में माइनस दो नंबर और उसके बाद कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट)-2016 में 28वीं रैंक। सुनने में थोड़ा अजीब है पर यह कारनामा किया है राजधानी के किसलय द्विवेदी ने। किसलय के अनुसार पापा हेमंत द्विवेदी आकाशवाणी में इंजीनियर हैं, इसलिए वे चाहते थे कि मैं भी यही पेशा चुनूं, पर मुझे इंजीनियरिंग अच्छी नहीं लगती थी। उनकेे कहने पर पिछली बार जेईई-मेन की परीक्षा दी थी, पर हुआ वही रहा जिसकी उम्मीद थी। रिजल्ट बेहद खराब रहा। मैथ्स में तो माइनस दो नंबर मिले। इसके बाद पापा ने भी लॉ फील्ड अपनाने की सहमति दे दी। पापा के साथ ही मम्मी शिवा पांडेय ने काफी सहयोग किया।

टिप्स- मॉक टेस्ट जरूर दें। इससे अभ्यास हो जाता है। अभ्यास अच्छा होने की वजह से पेपर के दौरान टाइम मैनेजमेंट अच्छा रहता है।

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नाना से मिली प्रेरणा- अनुभूति गर्ग (62वीं रैंक)

62वीं रैंक लाने वाली अनुभूति गर्ग के अनुसार अपनी सफलता का श्रेय वे नाना को देना चाहती हैं। अनुभूति के नाना जीडी अग्रवाल सेवानिवृत्त जस्टिस हैं, जबकि मां दीपाली और पिता अरुण गर्ग दोनों डॉक्टर हैं। इसके बावजूद मम्मी-पापा के पेशे के बजाय उन्होंने नाना के प्रोफेशन को अपनाया। अनुभूति के अनुसार उन्होंने पढ़ने पर बहुत ध्यान दिया। ये पढ़ाई विषय के अलावा अन्य किताबें भी थीं। इसका उन्हें काफी फायदा मिला।

टिप्स- इंग्लिश पर विशेष ध्यान दें। कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ सकें।
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जेईई क्वालीफाई कर छोड़ा, चुनी लॉ फील्ड - प्राची त्रिपाठी (107वीं रैंक)

जेईई मेन की परीक्षा दी थी। एग्जाम क्वालीफाई भी हो गया, लेकिन फिर लगा मैं इसके लिए नहीं बनी हूं। इसलिए मैंने लॉ फील्ड चुनने का फैसला किया। इसमें मेरी मां डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने भरपूर मदद की। ये कहना हैं क्लैट में 107वीं रैंक लाने वाली प्राची त्रिपाठी का। विकासनगर निवासी प्राची की मां डॉक्टर हैं। पढ़ाई के प्राची जॉब करना चाहती हैं।

टिप्स- रेग्यूलर स्टडी करें। सब्जेक्ट्स को लगातार पढ़ते रहें। मॉक टेस्ट का अभ्यास कर लें तो बेहतर है।
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रेग्यूलर स्टडी से मिली सफलता - सौम्या (121वीं रैंक)

121वीं रैंक लाने वाली सौम्या श्रीवास्तव के अनुसार उन्होंने रेग्यूलर स्टडी पर सबसे ज्यादा फोकस किया। टीचर्स ने भी इस बार पर जोर दिया। न्यूज पेपर पढ़ने की आदत, सामान्य ज्ञान ने सफलता हासिल करने में विशेष योगदान दिया। साक्षी के पिता अनिल श्रीवास्तव एसबीआई में काम करते हैं, जबकि मां मीना श्रीवास्तव गृहिणी हैं। साक्षी के अनुसार अभी उन्होंने सोचा नहीं है कि कोर्स पूरा होने के बाद क्या करना है।

टिप्स- न्यूज पेपर पढ़ने की आदत डालें, तैयारी के दौरान रेग्यूलर रहें सफलता जरूर मिलेगी।
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मानवाधिकार पर करना है काम - अवनी अग्रवाल (136वीं रैंक)

क्लैट में 136वीं रैंक हासिल करने वाली अवनी अग्रवाल मानवधिकार के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। अवनी के पिता डॉ. एसके अग्रवाल और मां डॉ. अंशू दोनों पीजीआई में डॉक्टर हैं। अवनी के अनुसार क्लैट की तैयारी के लिए जरूरी है कि मॉक टेस्ट दिए जाएं। रोजाना न्यूज पेपर पढ़ने की आदत से भी बहुत मदद मिलती है। पढ़ाई पूरी करने के बाद अवनी एनजीओ में जॉब करना चाहती हैं ताकि वो समाज के लिए कुछ कर सकें।

टिप्स- नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ें। जनरल नॉलेज पर लगातार फोकस करें।

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रटने से नहीं विषय को समझने से मिलेगी सफलता- अपूर्वा सिंह (137वीं रैंक)

क्लैट रट्टा मारकर नहीं पास किया जा सकता। सफलता के लिए रेग्यूलर और क्वालिटी स्टडी जरूरी है। यह कहना है क्लैट में 137वीं रैंक हासिल करने वाली अपूर्वा सिंह का। अपूर्वा के अनुसार क्लैट क्रैक करने के लिए रोजाना न्यूज पेपर पढ़ना बेहद जरूरी है। अपूर्वा के पिता अमर सिंह पत्रकार हैं जबकि मां नीलम सिंह गृहिणी हैं। अपूर्वा पढ़ाई के बाद खुद की प्रैक्टिस के बजाय जॉब करना चाहती हैं।

टिप्स- रेग्यूलर और क्वालिटी स्टडी

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जीके और इंग्लिश पर ध्यान दिलाएगा सफलता - कार्तिकेय सिंह (149वीं रैंक)

क्लैट की तैयारी सामान्य पढ़ाई की तरह नहीं है। जीके और इंग्लिश पर विशेष ध्यान देकर सफलता हासिल की जा सकती है। यह कहना है क्लैट-2016 में 149वीं रैंक लाने वाले कार्तिकेय सिंह का। उनके अनुसार क्लैट रट्टा मारकर पढ़ने वाला एग्जाम नहीं है विषय को समझकर पढ़ाई करनी चाहिए। इसलिए मैंने क्वालिटी स्टडी पर फोकस किया। कार्तिकेय के पिता संतोष सिंह सरकारी सेवा में है जबकि मां किरण सिंह हाउस वाइफ हैं।

टिप्स- सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी पर विशेष ध्यान दें। समाचार पत्र पढ़ने की आदत डालें।

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न्यायिक सेवा में जाना है लक्ष्य - राधिका शुक्ला (232वीं रैंक)

232वीं रैंक लाने वाली राधिका शुक्ला न्यायिक सेवा में जाना चाहती हैं। उनके अनुसार वे इस फील्ड में जाकर लोगों को जल्द से जल्द न्याय दिलाना चाहती हैं। राधिका के पिता पीयूष शुक्ल सरकारी सेवा में, जबकि मां सोनिका शुक्ला हाउस वाइफ हैं। अपनी सफलता में राधिका इन दोनों का योगदान सबसे ज्यादा देती हैं।

टिप्स- नियमित रूप से पढ़ाई करें। मॉक टेस्ट जरूर दें।

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चार पीढ़ियों से वकालत की विरासत को संभालेंगे ‘प्रथम' (271वीं रैंक)

नाम प्रथम है पर पारिवारिक पेशे को आगे बढ़ाने में उनका नंबर पांचवां है। परिवार की चार पीढ़ियों ने वकालत के पेशे में अपना अलग स्थान बना रखा है। पिता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील हैं। दादाजी हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस और उत्तर प्रदेश उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष रह चुके हैं। परदादा ने अंग्रेजों के समय क्रिमिनल एडवोकेट के रूप में नाम कमाया और महात्मा गांधी तथा जवाहर लाल नेहरू के साथ आजादी की लड़ाई में भागीदारी भी की। दादाजी के दादाजी अपने दौर में देश के उन चुनिंदा वकीलों में शुमार किए जाते थे जो अंग्रेजी में बहस करने में अंग्रेजों से भी आगे समझे जाते थे। बात हो रही है क्लैट-2016 में देशभर में 271वां स्थान हासिल करने वाले प्रथम मेहरोत्रा की। प्रथम मेहरोत्रा वकालत के पेशे से जुड़कर अपने परिवार की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

टिप्स- रोजाना अखबार जरूर पढ़ें, मॉक टेस्ट का अभ्यास करें और नियमित रूप से पढ़ाई करें।

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लोगों को न्याय दिलाने के लिए छोड़ी इंजीनियरिंग: संकल्प (309 रैंक)

हमेशा से ही इंजीनियरिंग करने की चाह रही। 2015 में जेईई मेन्स का एग्जाम क्वालिफाई भी कर लिया और एडवांस की तैयारी चल रही थी। तभी अचानक इंटरनेट पर कुछ ऐसे केस पढ़े जिनमें देखा कि कैसे लोगों को न्याय पाने के लिए जंग लड़नी पड़ती है। इसी बीच एक राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की गोल्ड मेडलिस्ट छात्रा की सक्सेस स्टोरी भी पढ़ी, जिसमें उसने बताया था कि उसके पिता का कोई कोर्ट केस चल रहा था। मगर, उन्हें न्याय न मिल सका। इसीलिए उस छात्रा ने न सिर्फ लॉ की पढ़ाई की, बल्कि टॉप कर गोल्ड मेडल भी हासिल किया। बस इन्हीं सब बातों के बाद संकल्प अग्निहोत्री ने भी ठान लिया कि वह अब इंजीनियरिंग नहीं बल्कि लॉ की पढ़ाई कर लेटिगेशन में जाएगा। इसके बाद संकल्प ने एडवांस की परीक्षा ही नहीं दी और घर पर ही क्लैट की तैयारी में जुट गया। एक साल सेल्फ स्टडी करके संकल्प ने सोमवार को आए क्लैट रिजल्ट में ऑल इंडिया 309वीं रैंक हासिल की है। संकल्प के पिता आरके अग्निहोत्री सरकारी कर्मचारी और मां सारिका अग्निहोत्री गृहिणी हैं।

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महीने भर की की पढ़ाई से हासिल की सफलता- अमितांशु (176वीं रैंक)

अमितांशु सक्सेना ने महीने भर की पढ़ाई में ही क्लैट में 176वां स्थान हासिल कर लिया। बरेली के रहने वाले अमितांशु ने घर वालों के दबाव में वहीं हार्टमैन कॉलेज में 12वीं में पीसीएम ग्रुप लिया। मेहनत की और मुझे 96.24 प्रतिशत अंक मिले। जीके और डिबेट पॉइंट अच्छे होने की वजह से मैंने क्लैट की तैयारी की। परीक्षा में मुझे 176वीं रैंक मिली। लॉ करने के बाद अमितांशु आईएएस की तैयारी करने की बात कहते हैं। उनके पापा स्व. अमिताभ सक्सेना पत्रकार थे और मम्मी वैशाली शिक्षिका हैं, जबकि दादा किशन सरोज कवि हैं।
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एलएलएम में प्रणव ने हासिल की 27वीं रैंक

प्रणव त्रिपाठी ने एलएलएम के लिए हुई प्रवेश परीक्षा में 27वीं रैंक हासिल की है। प्रणव त्रिपाठी एलएलएम करने के बाद न्यायिक सेवा में जाना चाहते हैं। उनके अनुसार रेग्यूलर स्टडी और सामान्य ज्ञान पर पकड़ के दम पर ही परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल की जा सकती है।
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