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नीट में लखनऊ के मेधावियों का जोरदार प्रदर्शन, 41वीं रैंक लाकर अर्जुन सारस्वत ने किया नाम रोशन

Tue, 05 Jun 2018 02:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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नीट रिजल्ट - फोटो : amar ujala
एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिले के लिए हुआ नेशनल इलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के रिजल्ट में एक बार फिर से राजधानी के मेधावी छाए रहे। राष्ट्रीय स्तर पर 41वीं रैंक लाकर अर्जुन सारस्वत ने लखनऊ का नाम रोशन किया। वहीं उज्जवल पाठक ने 154वीं रैंक हासिल की तो मुदित कश्यप 217वीं और जरीन अख्तर 495वीं रैंक लाए।

इनके अलावा कात्यायनी अनंता ने 863वीं, तनवीर खान ने 1114वीं, रोहित दिवेदी ने 1200वीं, सुधांशी दीक्षित ने 1386 और मृदृल गर्ग ने 1502वीं रैंक हासिल की। लखनऊ सहित पूरे देश में नीट का आयोजन छह मई को किया गया था। इसका रिजल्ट पांच जून को घोषित होना था, लेकिन एक दिन पहले ही जारी कर दिया गया।
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नीट रिजल्ट - फोटो : amar ujala
अर्जुन सारस्वत- एआईआर 41
गणित में रुचि नहीं थी तो इस तरफ आ गया
मैं भूतनाथ में रहता हूं। 10वीं में मैं गणित विषय से पढ़ाई कर रहा था लेकिन उसमें रुचि नहीं थी। इसकी वजह से फिजिक्स की तरफ ध्यान देना शुरू किया। पिता अबीर सारस्वत त्वचा रोग विशेषज्ञ तो मां मोनिका पैथोलॉजिस्ट हैं। मैं मौलाना आजाद, वर्धमान महावीर जैसे संस्थानों में प्रवेश लेकर पढ़ना और डॉक्टर बनना चाहता हूं। मेरे ओवरऑल 720 में 669 नंबर हैं। गत वर्ष मेरी 6500वीं रैंक थी। अभी एम्स के परिणाम का इंतजार है। मुझे जर्मन भाषा भी आती है और मैं सीएमएस गोमतीनगर में बच्चों की क्लास भी लेता हूं।

हॉबी- गिटार बजाना, स्टोरी लिखना, ब्लॉग लिखना

टिप्स- टेक्स्ट बुक्स पढ़ी और कोचिंग के नोट्स से तैयारी की। सफलता पानी है तो एनसीईआरटी रट डालो। कॉन्सेप्ट क्लीयर कर पढ़ाई करने पर सफलता मिलती है।
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नीट रिजल्ट - फोटो : amar ujala
उज्जवल पाठक- एआईआर 154
पिता से प्रेरित होकर डॉक्टर बनने की सोची
मैं जानकीपुरम एक्सटेंशन में रहता हूं। मेरे पिता ओमप्रकाश पाठक पीडियाट्रीशियन हैं। मैने उन्हीं से प्रभावित होकर डॉक्टर बनने की सोची। मां किरण पाठक शिक्षिका हैं, उन्होंने भी लक्ष्य को पाने में मेरा काफी सहयोग किया। मैं न्यूरो सर्जन बनना चाहता हूं। सेंट्रल एकेडमी व रैशफेल एकेडमी से शुरूआती शिक्षा पूरी की है। मुझे पहले प्रयास में ही सफलता मिली है।

हॉबीज- गाने गाना और सुनना, डांस करना

टिप्स- हर विषय की अलग से तैयारी करें और उन्हें एक निर्धारित समय दें। पढ़ाई के लिए घंटे नहीं तय किए लेकिन जब मन किया तब पढ़ाई की।

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मुदित कश्यप- एआईआर 217
डॉक्टर बनकर करूंगा सेवा
मैं गोमतीनगर में रहता हूं। कार्डियोलॉजिस्ट बनकर लोगों की सेवा करने की इच्छा है। पिता प्रशांत कश्यप सिविल इंजीनियर व मां ऋचा कश्यप डीपीएस में शिक्षिका हैं। मैं दिल्ली में प्रवेश लेना चाहता हूं। मैं अपने फूफा सीएमओ फैजाबाद डॉ. हरिओम श्रीवास्तव से काफी प्रभावित हूं। उनसे ही मुझे डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिली। मैने स्टडी हॉल स्कूल से इंटर की शिक्षा प्राप्त की है। अपने दूसरे प्रयास में सफलता पाने वाले मुदित की गत वर्ष 12224 रैंक थी।

हॉबीज- क्रिकेट, किताबें पढ़ना

टिप्स- खुद पर भरोसा रखकर अपने से तैयारी करें। एनसीईआरटी की किताबों से तैयारी करें। क्लास नोट्स का पूरा प्रयोग करें। रटने के बजाय कॉन्सेप्ट क्लीयर करने पर जोर दें।
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जरीन अख्तर (रैंक-495)
कमजोरियों को पहचाना और दूर किया
पिछली बार नीट के रिजल्ट में तीन हजार से ज्यादा रैंक आई थी। भरोसा था कि इससे बेहतर कर सकती हूं। इसलिए अपनी कमियों को दूर किया और दोबारा परीक्षा दी। उम्मीद है कि इस रैंक पर केजीएमयू में दाखिला मिल जाएगा। नीट में सफलता हासिल करने के लिए रेग्युलरिटी बहुत जरूरी है। नोट्स का अध्ययन और प्रैक्टिस का भी सफलता में बड़ा योगदान रहा। मेरे पिता अख्तर अली इंजीनियर तथा मां रुखसाना अंसारी गृहिणी हैं।

टिप्स--नोटस बनाएं, नियमित रूप से उनका अध्ययन करें और बराबर प्रैक्टिस करते रहें।

 
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कात्यायनी अनंता- एआईआर 863
मेडिकल टीचर बनकर करना है जागरूक

मेरे पिता विनय कुमार एसबीआई में ब्रांच मैनेजर हैं और मां अरपना गृहणी। मैं अपनी बुआ डॉ. संध्या सिंह और चाचा डॉ. विनीत कुमार से प्रभावित हूं। मैं केजीएमयू में प्रवेश लेकर पढ़ाई करना और मेडिकल टीचर बनना चाहती हूं। एक शिक्षक बनकर ज्यादा लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक करूंगी। मैंने आरएलबी से हाईस्कूल-इंटर किया है। सफलता मुझे पहले प्रयास में मिली।

हॉबीज- स्केचिंग, पेंटिंग करना

टिप्स- जब जो मन करे, वही पढ़ना चाहिए। एनसीईआरटीई की किताबों से पढ़ाई करें। नियमित पढ़ाई से सफलता मिलती है।
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शुभांशी दीक्षित- एआईआर 1386

दादी को कैंसर ने छीना तब डॉक्टर बनने की ठानी
2014 में जब मेरी दादी जयप्रदा दीक्षित को कैंसर हुआ और इसी कारण उनकी मौत हुई तब मैने डॉक्टर बनने की ठान ली। मैं कल्याणपुर में रहती हूं। पिता धीरेंद्र दीक्षित सरकारी कर्मचारी तो मां कविता दीक्षित गृहणी हैं। इन दोनों का मुझे भरपूर सहयोग मिला। मैं अपने चचेरे भाई अंकित मिश्रा से प्रभावित हूं जो एम्स में सीनियर रेजीडेंट हैं। में केजीएमयू में प्रवेश लेकर सर्जन बनना चाहती हूं। मुझे दूसरे प्रयास में सफलता मिली है। गत वर्ष 1300 रैंक थीं।

हॉबीज- गानें सुनना, लोगों की सेवा करना।

टिप्स- किसी भी परीक्षा में सफल होने के लिए आत्मविश्वास बहुत जरूरी है। बायो में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ें और फिजिक्स-केमिस्ट्री में क्लास नोट्स से तैयारी करें।
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मृदुल गर्ग- एआईआर 1502
बढ़ती बीमारियों पर रोक लगाने की इच्छा
मेरे पिता प्रशांत प्रकाश गर्ग आरडीएसओ में पीए और मां रुचि गर्ग गृहणी हैं। बढ़ती बीमारियों को देख डॉक्टर बनने की सोची। जिस तेजी से बीमारियां बढ़ रही हैं, लोगों को इसके प्रति जागरूक करना होगा। मैं न्यूरो सर्जन बनना चाहत हूं। क्योंकि अभी भी इसके डॉक्टर कम हैं। मैं सेक्टर-डी कानपुर रोड में रहता हूं। केजीएमयू से पढ़ाई करने की चाह है। मैं एलपीएस से पढ़ा हूं।

हॉबीज- क्रिकेट खेलना, गानें सुनना

टिप्स- क्वालिटी ऑफ क्वेशचन पर जोर दिया। बायो में एनसीईआरटी बुक्स और फिजिक्स-केमेस्ट्री में क्लास के नोट्स पढ़े। 6 से 8 घंटे प्रतिदिन तैयारी की और रिवीजन पर जोर दिया।
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