गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार को हॉकी, फुटबॉल और वॉलीबाल के दस प्रशिक्षुओं को निष्कासित किए जाने का विरोध हुआ तो कार्यवाहक प्रिंसिपल आरएन सिंह यादव ने पुलिस बुलाकर डेढ़ घंटे में पूरा हॉस्टल ही खाली करा दिया।
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प्रिंसिपल ने पुलिस बुलाकर डेढ़ घंटे में खाली क्यों करवाया बॉयज हॉस्टल?
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हॉस्टल में रह रहे तकरीबन 350 छात्रों को एक हफ्ते बाद ही आने को कहा गया। इस पूरे मामले को लेकर खेल विभाग के आला अफसर चुप्पी साधे हुए हैं,जबकि प्रिंसिपल ने अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया।
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छात्रों का कहना है कि सरकार ने स्पोर्ट्स कॉलेज के खिलाड़ियों की डाइट मनी को 100 से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया है। इसके बावजूद खाना घटिया दिया जाता है। यही नहीं पर्याप्त खाना न मिलने का भी छात्रों ने आरोप लगाया। दूध,दलिया की मात्रा घटा दी गई। नॉनवेज खाना भी बहुत कम मात्रा में दिया जाता है।
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कार्रवाई से क्षुब्ध खिलाड़ियों ने कहा कि हॉस्टल में रहने वाले ज्यादातर बच्चे सूबे के दूर-दराज इलाकों से हैं। इसके बावजूद किसी को अभिभावक को बुलाने तक का मौका तक नहीं दिया गया।
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कुछ छात्रों ने बताया कि हमारे पास घर जाने तक के पैसे नहीं हैं। जिस तरह से आश्वासन के बाद दस का निष्कासन किया गया उसको लेकर भी छात्रों में चिंता है।
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बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरने के समय क्यों लिया गया फैसला क्रिकेट को छोड़ दिया जाए तो यह वक्त हॉकी,फुटबॉल,बैडमिंटन जैसे खेलों के लिए पीक सीजन है। साथ ही बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भी भरे जाने हैं
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कार्रवाई के बाद प्रिंसिपल ने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। उन्होंने इस बात की भी फिक्र नहीं की कि बच्चे कैसे घर जाएंगे। उनके पास पैसे हैं या नहीं।
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वहीं खेल निदेशक डॉ. आरपी सिंह ने मामले से अनिभिज्ञता जताते हुए कहा कि मेरा स्पोर्ट्स कॉलेज में कोई दखल नहीं है। इसलिए कुछ नहीं बोल सकता। जबकि खेल सचिव भुवनेश कुमार ने कॉलेज के बारे में कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया।