प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी आगरा एक्सप्रेस-वे परियोजना की जद में आए बेसिक शिक्षा परिषद के दो स्कूल एक साल बीतने के बावजूद आज तक नहीं बन सके हैं। एक्सप्रेस-वे निर्माण की वजह से बेसिक शिक्षा परिषद के दो परिषदीय स्कूल मई 2015 में तोड़ दिए गए थे। तब से दोनों स्कूल पड़ोस के तीसरे परिषदीय स्कूल में संचालित हो रहे हैं।
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स्कूल में सिर्फ चार कमरे हैं और तीन स्कूल में बच्चे तीन सौ से ज्यादा हैं। ऐसे में बच्चे ठूंस-ठूंसकर बिठाए जा रहे हैं। इस वजह से आए दिन बच्चों की तबीयत बिगड़ती रहती है। शनिवार को भी दो बच्चे बेहोश हो गए।
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बच्चों को प्राथमिक इलाज मुहैया कराया गया। घटना के बाद अभिभावकों में खासा रोष है। स्कूल भवन टूटने के बाद अधिकारियों ने जल्द से जल्द नए भवन बनवाने की बात कही थी पर उनका दावा अभी तक पूरा नहीं हुआ।
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लखनऊ से आगरा तक 302 किलोमीटर के छह लेन के एक्सप्रेस वे के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया है। रास्ते में आने वाले भवनों को भी ढहाया जा रहा है। विकास खंड काकोरी में एक्सप्रेस-वे की जद में प्राथमिक विद्यालय माधवपुर और पूर्व माध्यमिक विद्यालय जलियामऊ आ गए थे। मई 2015 में दोनों स्कूल भवन ढहा दिए गए थे। दोनों स्कूलों को प्राथमिक विद्यालय जलियामऊ में शिफ्ट कर दिया गया।
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गर्मी और बैठने की पर्याप्त जगह न होने की वजह से शनिवार को कक्षा छह की छात्रा नीति और कक्षा तीन के छात्र कपिल की हालत खराब हो गई। दोनों को पानी पिलाया गया व प्राथमिक उपचार कराया गया। बच्चों की हालत खराब होने की बात पर अभिभावक भी स्कूल पहुंचे और उन्होंने काफी रोष प्रकट किया।
कम हो रहे बच्चे
स्कूल भवन ढहाए जाने के समय पूर्व माध्यमिक विद्यालय जलियामऊ में 88 और प्राथमिक विद्यालय माधवपुर में 118 बच्चे पढ़ रहे थे, जबकि प्राथमिक विद्यालय में 113 बच्चे थे। इस संख्या में गिरावट आई है। इस समय पूर्व माध्यमिक विद्यालय जलियामऊ में 76, प्राथमिक विद्यालय माधवपुर में 86 और प्राथमिक विद्यालय जलियामऊ में 92 बच्चे बचे हैं। बच्चों की हालत खराब होते देखकर इसमें और कमी आने की आशंका है।