बच्चे जो देखते हैं और महसूस करते हैं उसका उनके दिलो दिमाग पर पुस्तकों से कहीं जल्द असर पड़ता है। चाहे खेल-खेल में पढ़ाना हो या फिर खिलौने से उनके मन मस्तिष्क में रचनात्मकता को जाग्रत करना हो। ऐसे ही काम में जुटे हैं डॉ रामदास, जो गांव में पाए जाने वाले सरकंडे से खिलौने बनाते हैं और बच्चों को बनाना सिखाते हैं। इन खिलौनों के जरिए वह बच्चों को पढ़ाते हैं और उनमें कुछ गढ़ने का हौसला बढ़ाते हैं।