आपने पुलिस को लोगों को बेदर्द तरीके से पीटने की तस्वीरें जरूर देखी होंगी, लेकिन ऐसी तस्वीरें नहीं देखी होंगी जिसमें लोगों ने पुलिस को इस तरह से दौड़ाकर पीटा। पुलिस और ग्रामीणों के बीच का यह टकराव बहुत ही हिंसक रहा।
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पुलिस को इस तरह पहले पिटते हुए नहीं देखा होगा?
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लखनऊ के ठाकुरगंज में घैला पुल तिराहा आईआईएम रोड पर मंगलवार सुबह सड़क हादसे में माल के बेहटा काकराबाद निवासी प्रमोद सैनी (20) की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने छह घंटे तक उपद्रव किया।
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ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने प्रमोद को कुचलने वाले ट्रैक्टर चालक को पकड़कर पुलिसकर्मियों की सुपुर्दगी में दिया था लेकिन उन्होंने 2000 रुपये लेकर आरोपी को छोड़ दिया। इससे आक्रोशित करीब 500 ग्रामीण घैला पुल पर एकत्र हो गए और सड़क जाम कर दी।
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पुलिस ने लाठियां पटकीं तो ग्रामीण पुल के दूसरी तरफ पहुंच गए और पथराव करने लगे। माहौल बेकाबू होते देख पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी व रबर बुलेट फायर किए। दूसरी तरफ से ग्रामीणों ने भी गोलियां चलाईं और वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। ट्रैक्टर-ट्राली में आग लगा दी।
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सिटी मजिस्ट्रेट सहित एसडीएम सदर, एसडीएम बीकेटी, सीओ मलिहाबाद के अलावा काकोरी, ठाकुरगंज, मड़ियांव, तालकटोरा पुलिस मौके पर बुलवा ली गई। संघर्ष में 12 पुलिसकर्मी व ग्रामीण घायल हो गए।
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संघर्ष के दौरान पीएसी के सिपाही करन सिंह का सिर फट गया जबकि रिंग रोड चौकी इंचार्ज जर्नादन यादव को चोटे आई हैं। उधर, लाठीचार्ज में मृतक प्रमोद के चचेरे भाई राजू सैनी, गांव के सुमेर यादव, छोटू रैदास सहित छह लोग चोटिल हुए हैं।
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आपसी संघर्ष का खामियाजा राहगीरों को भी भुगतना पड़ा। आईआईएम रोड से गुजर रहे चार लोगों को पथराव में मामूली चोटें आईं। भीड़ ने एक राहगीर की कार में भी तोड़फोड़ की।
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दोपहर करीब दो बजे एसीएम कौशलेंद्र मिश्रा व तहसीलदार सदर जेपी यादव के कार्रवाई के आश्वासन पर ग्रामीणों ने जाम खोला। ग्रामीण 25 लाख रुपये मुआवजा, मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, गांव में पट्टे की जमीन और ट्रैक्टर-ट्राली के चालक की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े थे।
अफसरों ने कृषक दुर्घटना बीमा का लाभ, पट्टे की जमीन दिलाने व रुपया लेकर चालक को छोड़ने वाले पुलिसकर्मियों की जांच कर कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए।