डॉ.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में 612 संविदा कर्मचारियों की हड़ताल से मरीजों पर आफत टूट पड़ी। ओपीडी से लेकर जांच केंद्र और पर्चा काउंटर तक मरीजों की भीड़ लगी रही।
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पैसों के लिए सड़कों पर कर्मचारी, अस्पताल खाली
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गैस्ट्रो, कैंसर, हृदय, यूरोलॉजी और हड्डी रोग से पीडि़त मरीज इलाज के लिए दर-दर की ठोकरे खाते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सभी विभाग बंद रहे।
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सुबह आठ बजे से ही कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने की वजह से ओपीडी से लेकर ओटी और वार्ड तक में अव्यवस्था का माहौल रहा। हड़ताल का सबसे बुरा असर पहले से तय मरीजों के ऑपरेशन पड़ा।
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संस्थान से मिली जानकारी के मुताबिक न्यूरो, यूरो, ऑकोलॉजी विभाग में कुल दस मरीजों के ऑपरेशन अव्यवस्था की वजह से टाल दिए गए। सुबह ग्यारह बजे तक हालात बेकाबू हो गए। हजारों मरीजों की भीड़ ओपीडी के बाहर खड़ी रही लेकिन डॉक्टर से दिखाने के लिए कोई कर्मचारी टोकन देने के लिए नहीं था।
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आनन-फानन में संस्थान की निदेशक प्रो. नुजहत हुसैन और चिकित्सा अधीक्षक ने सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे ओपीडी का ताला खुलवाया और तब डॉक्टरों ने बिना मरीजों को देखना शुरू किया।
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डॉक्टर मरीजों को देखने लगे और जांच के साथ भर्ती लिखने लगे तो ऑपरेटरों के हड़ताल पर रहने की वजह से भर्ती कार्ड नहीं बन सका तो जांच केंद्र पर पैसा जमा नहीं हो सका।
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संविदा कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी की मांग का बुरा असर इतना अधिक पड़ा कि हजारों की संख्या में गंभीर मरीज बिना इलाज लौट गए। संस्थान की निदेशक प्रो.नुजहत हुसैन का कहना है कि कर्मचारियों की जो भी मांग है वो मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव को बता दी गई है।
जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा। चिकित्सकों ने अपने दम पर ओपीडी को चलाया और न्यूरो ओटी में मरीजों का ऑपरेशन भी हुआ। थोड़ी परेशानी हुई लेकिन सब ठीक करा लिया गया था।