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नखलऊवा पंचः दूसरों के लिए रद्द कर दिया भाई का ट्रांसफर, ऐसे थे रफी अहमद किदवई

Fri, 07 Dec 2018 04:18 PM IST
ishwar ashish अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
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रफी अहमद किदवई - फोटो : डेमो
रफी अहमद किदवई का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। उनकी सरलता के विरोधी भी कायल रहते थे। उनके दरवाजे हर जरूरतमंद के लिए 24 घंटे खुले रहते। हालांकि उनके इस स्वभाव का लोग गाहे बगाहे बेजा फायदा भी उठा लेते थे। कोई टोकता तो कहते मुद्दा यह नहीं कि उसने झूठ बोलकर मदद ली है। 
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रफी अहमद किदवई - फोटो : डेमो
मुद्दा यह है कि उसे जरूरत थी तभी तो मदद मांगने आया। एक बार जब उन्हें यह पता चला कि कांग्रेस के एक नेता पैसों की किल्लत के कारण बेटी की शादी नहीं कर पा रहे हैं तो वह उनके घर पहुंच गए और मदद की। यह नेता रफी के राजनीतिक प्रतिद्वंदी थे और कभी रफी को कांग्रेस से निकलवाने की मुहिम चला चुके थे 
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रफी अहमद किदवई - फोटो : डेमो
डाॅ एम. हाफिज किदवई ने संस्मरण में लिखा है रफी अहमद किदवई प्रदेश के गृहमंत्री थे। मुस्तफा कामिल किदवई रिश्ते में उनके भाई लगते थे। मुस्तफा उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में थे। वह लखनऊ आना चाह रहे थे। अधिकारी रफी साहब से उनका रिश्ता जानते थे। 

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रफी अहमद किदवई - फोटो : डेमो
लिहाजा उन्होंने मुस्तफा का तबादला लखनऊ कर दिया। जिस जगह मुस्तफा का तबादला हुआ, वहां पर जो अधिकारी नियुक्त थे वह परेशान हो गए। उन्होंने  रफी साहब से मिलने का वक्त मांगा। मिले तो कहा, मेरी पत्नी लखनऊ के अमुक कॉलेज में पढ़ रही है। तबादला होने से पढ़ाई में बाधा पढ़ेगी। 
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रफी अहमद किदवई - फोटो : डेमो
रफी साहब ने पूरी बात सुनी और उसी दिन मुस्तफा कामिल किदवई का लखनऊ हुआ तबादला रद्द हो गया। घर वालों ने कहा तो बोले, 'अपने लोगों की सुविधा के लिए दूसरों के लिए समस्या खड़ी करना कहां का न्याय है।' 
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