डॉक्टरी उनके लिए महज पेशा नहीं। उनके लिए पुण्य कमाने का वह अवसर है, जो ईश्वर ने उन्हें दिया है। उनका मानना है कि जीविकोपार्जन के लिए तो कोई भी विधा अपनाई जा सकती है, लेकिन सामाजिक सरोकार तो इसी से पूरे होते हैं। उनके अनुसार मरीजों की सेवा करने से जो संतोष मिलता है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। ये सिर्फ शब्द नहीं बल्कि एक ऐसा अहसास है, जिसे वे लोग जी रहे हैं। यही वजह है कि उनके यहां एक या दो नहीं बल्कि पूरा परिवार चिकित्सकीय कार्य में जुटा है। कुछ तो इनमें से ऐसे हैं, जिनकी कई पीढ़ियों ने मरीजों की सेवा को ही सब कुछ मान लिया है। डॉक्टर्स डे पर आइए सलाम करते हैं ऐसे चिकित्सकों को...।
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डॉक्टर्स डे
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चिकित्सा सेवा में आया बेटा तो पूरे परिवार को मिला संतोष
सिविल अस्पताल के डॉ. एके गुप्ता का परिवार चिकित्सा सेवा से जुड़ा हुआ है। डॉ. गुप्ता की पत्नी डॉ. रश्मि गुप्ता बाल महिला चिकित्सालय इंग्रानगर में गायनोकोलॉजिस्ट हैं। डॉ. रश्मि के पिता डॉ. एमएल गुप्ता केजीएमयू के फार्मोकोलॉजी विभाग से सेवानिवृत्त हैं और भाई डॉ. विवेक गुप्ता नामचीन अस्पताल से जुड़े हैं। यह डॉक्टर दंपति चिकित्सा सेवा से इतर हर सप्ताह मरीजों को निशुल्क सेवाएं भी देते हैं।
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डॉ. गुप्ता बताते हैं कि उनका बड़ा बेटा अपार गुप्ता इंजीनियरिंग सेवा में हैं। चिकित्सा सेवा की बिजी लाइफ को देखते हुए उसने दूसरा फिल्ड चुना, लेकिन जब वे किसी गरीब मरीज से मिलता है तो घर आकर गुहार लगाता है। वे उसे निशुल्क परामर्श देते हैं। ठीक होने के बाद वही मरीज घर आकर दुआएं दे जाता है। आभार जताता है। यह देखकर उन्होंने दूसरे बेटे से बात की। उसे डॉक्टरी पेशे में आने को कहा। बेटा अनन्य गुप्ता ने हामी भरी और पहली ही बार में एमबीबीएस में दाखिला पा लिया। एमबीबीएस से एमडी तक उसे कई अवॉर्ड भी मिले हैं। उसमें भी सेवाभाव साफ तौर पर दिखता है। यह देखकर मन को शांति मिलती है। उम्मीद है कि मरीजों की सेवा का व्रत आगे भी चलता रहेगा।
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पीढ़ी-दर-पीढ़ी परंपरा का पालन
केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष रहे प्रो. अवतार सिंह वाखलू का परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी मरीजों की सेवा में लगा है। प्रो. वाखलू की पत्नी प्रो. इंदू पीडियाट्रिक विभाग से सेवानिवृत्त हैं। डॉ. इंदू वाखलू बताती हैं कि उनका पूरा परिवार चिकित्सा सेवा से जुड़ा रहा है। पिता प्रो. एसके गुप्ता ने केजीएमयू में पैथोलॉजी विभाग की स्थापना की। भाई डॉ. अशोक और भाभी डॉ. मधु गुप्ता भी मरीजों की सेवा में लगे हैं। ऐसे में बेटे को भी हमने डॉक्टर बनाने की ठानी।
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अब बड़ा बेटा प्रो. आशीष वाखलू पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में हैं तो उसकी पत्नी डॉ. गीता वाखलू कमांड हॉस्पिटल में मरीजों की सेवा में लगी हैं। इसी तरह दूसरे बेटे प्रो. अनुपम वाखलू गठिया रोग विभाग के विभागाध्यक्ष हैं और उसकी पत्नी डॉ. अर्चना वाखलू भी मरीजों की सेवा में लगी हैं। ज्यादातर रिश्तेदार भी चिकित्सा सेवा में हैं। अब तीसरी पीढ़ी के बच्चों में कुछ ने दूसरी क्षेत्र में कॅरिअर बनाया है। कुछ चिकित्सा सेवा में आने की तैयारी में जुटे हैं।
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मरीजों की सेवा में समर्पित
केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. एसएन कुरील की पत्नी डॉ. एसपी जैसवार भी क्वीन मेरी अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं। बेटी डॉ. अपाला प्रियदर्शिनी गायनोकोलॉजिस्ट हैं और दामाद डॉ. सुनील कुमार पीडियाट्रिक सर्जन हैं। उनका पूरा परिवार मरीजों की सेवा में समर्पित है। डॉ. जैसवार बताती हैं कि जब हम सब घर पर साथ होते हैं तो अक्सर मरीजों की ही बातें होती रहती हैं। इस दौरान एक-दूसरे से सलाह और मशविरा भी लेते रहते हैं।
वो बताती हैं कि अगर कोई परिवार का सदस्य या दूरदराज का रिश्तेदार भी बीमार होता है तो वो हमारे पास ही आता है। किसी की मदद करने या काम आने में, ड्यूटी के रूप में भी जरूरतमंदों की सेवा में जो संतुष्टि मिलती है किसी और प्रोफेशन में नहीं मिल सकती।