क्या कोई मॉं किसी ऐसे शख्स की जान बचा सकती है जो उसके बेटे की हत्या की कई बार कोशिश कर चुका हो। पर, विस्मिल की मॉं ने ऐसा ही किया। विस्मिल का एक साथी गद्दार हो गया। वह प्रयाग में रहता था और कई बार विस्मिल को पकड़वाने की कोशिश कर चुका था।
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राम प्रसाद बिस्मिल
- फोटो : डेमो
विस्मिल के एक साथी ने बदला लेने का प्रस्ताव रखा। तय हुआ कि बदला लेना ही चाहिए। उसने विस्मिल से भी साथ चलने को कहा। विस्मिल ने दो साथियों को और लिया। सभी चार लोग संगम पहुंचे। गंगा पार करके यमुना के तट पर विस्मिल संध्या उपासना के लिए एक ऊंचे स्थान पर बैठ गए।
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राम प्रसाद बिस्मिल
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विस्मिल ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, 'बदला लेने की तजबीज बताकर प्रयाग लेकर लाने वाले महाशय ने कहा, 'यमुना के किनारे बैठो। पर, मैने उनकी बात अनसुनी कर दी। जहां बैठा था वही बैठकर संध्या बंदन करने लगा। आंखें बंद कर लीं। तभी फायर की आवाज हुई और लगा कि कोई चीज हमारे कान को छूते हुए निकली है।
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राम प्रसाद बिस्मिल
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तुरंत रिवाल्वर निकाला और घूमकर देखा, वही महाशय गोली चला रहे थे जो बदला लेने का सुझाव देकर प्रयाग लाए थे । मैने रिवाल्वर निकाल ली तो वे भाग गया। मैंने कसम खाई कि जिसने गोली चलाई है उसे मार दूंगा। इस बात का माता जी को पता चल गया। उन्होंने कहा 'प्रतिज्ञा करो कि जिसने तुम्हारी जान लेने की कोशिश की उसको तुम मारोगे नहीं।