फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इन आईपीएस ने स्टिंग ऑपरेशन कराकर बेलगाम थानेदारों को नापा, जरूरतमंदों को बनाया दोस्त

Thu, 06 Sep 2018 04:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 5
आईपीएस चंद्र प्रकाश - फोटो : amar ujala
लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दी वालों से परिचित कराते हैं। इनमें चंद्र प्रकाश की अपनी अलग पहचान है। राजधानी में डीआईजी और आईजी के पद पर तैनात रहे चंद्र प्रकाश को जनता की सीधी सुनवाई, अपराधियों और लापरवाह पुलिसकर्मियों के प्रति कड़क मिजाज को लेकर याद किया जाता है। 
विज्ञापन

2 of 5
- फोटो : डेमो
13 मई 07 को बसपा सरकार बनने पर तेजतर्रार आईपीएस चंद्र प्रकाश को लखनऊ परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक बनाकर छह जिलों में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने दिन में जनता की सुनवाई और देर रात तक खुद गश्त शुरू की। इससे थानेदार ही नहीं कप्तान तक की गाड़ियां विभिन्न क्षेत्रों में दौड़ने लगीं। सफेदपोश अपराधियों की धरपकड़ शुरू होते ही बदमाशों के हौसले पस्त होने शुरू हुए। 
विज्ञापन

3 of 5
डेमो
सत्तारूढ़ दल के सांसद-विधायक ही नहीं मंत्री तक अपराधियों को संरक्षण देने और उनकी सिफारिश से कतराने लगे। भयमुक्त माहौल बनाने के लिए कद्दावर लोगों पर कार्रवाई शुरू करते ही वह राजनेताओं को खटकने लगे। दबाव बनने पर उनका तबादला किया। कुछ दिनों बाद हालात गड़बड़ाने शुरू हुए और नौ नवंबर 2010 को उनकी लखनऊ परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनाती हुई। 

4 of 5
UP Police
अपराधियों की धरपकड़ के साथ बेलगाम पुलिसकर्मियों पर शिकंजा कसा। तैनाती के महीना भर बाद उन्होंने थानों का स्टिंग ऑपरेशन कराया। पर्स लूट की प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंची युवती को कुछ पैसे देकर आलमबाग और ठाकुरगंज थाने से टरका दिया गया। इतना ही नहीं ठाकुरगंज के तत्कालीन थानाध्यक्ष ने उससे मोबाइल पर बातचीत शुरू कर दी। राजनेताओं से करीबी संबंधों का बखान करने वाले दोनों थानेदारों पर कार्रवाई होते ही राजधानी ही नहीं पूरे परिक्षेत्र में पीड़ितों को थाने से टरकाने का सिलसिला थम गया।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
डेमो - फोटो : डेमो पिक
चंद्र प्रकाश ने पुलिस व संभ्रांत लोगों के बीच की दूरी कम करने के ठोस प्रयास किए थे। उन्होंने पत्नी को स्नातक की डिग्री दिलाने के लिए दिन में मजदूरी और रात को रिक्शा चलाने वाले दिव्यांग को अपनाया। उसकी न सिर्फ आर्थिक मदद की, बल्कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत सहायता दिलाई। अमर उजाला की पहल पर चंद्र प्रकाश द्वारा की गई मदद से दिव्यांग को चतुर्थश्रेणी कर्मचारी की नौकरी मिली और उसकी पत्नी ने बीए पास किया। इसी तरह अन्य जरूरतमंद लोगों की मदद की। लोगों के जुड़ने से उनका मजबूत नेटवर्क तैयार हुआ। उन्हें न सिर्फ संगीन वारदात की थानेदार से पहले सूचना मिलती थी, बल्कि बदमाशों का भी सुराग लग जाता था।  


 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें