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ये आईपीएस जूनियरों को फटकारने की जगह मुस्कराकर कराते थे सुधार, अनोखा था इनका अंदाज

Sat, 20 Oct 2018 03:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आईपीएस बीपी जोगदंड - फोटो : amar ujala
लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दीवालों से परिचित कराते हैं। इनमें बीपी जोगदंड की अलग पहचान थी। बगैर डांट-फटकार के महकमे में अनुशासन बनाने के लिए उन्हें याद किया जाता है। 
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- फोटो : डेमो
वर्ष 2007 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के दूसरे दिन आईपीएस बीपी जोगदंड को राजधानी पुलिस की कमान सौंपी गई। कानून व्यवस्था को लेकर तनावपूर्ण हालात थे। जोगदंड ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का कार्यभार संभालते ही थाना और चौकी प्रभारियों को मामूली झगड़े पर भी मौके पर भेजकर घटनाओं को राजनीतिक रूप लेने से बचाया।
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डेमो
बेअंदाज थानेदारों को डांट-फटकार के बजाय मुस्कराकर शासन की मंशा समझाई और चंद दिनों में ही सब अनुशासित नजर आने लगे। संगीन वारदात पर विचलित होकर मातहतों को फटकारने के बजाय वह खुद मौके पर जाकर माजरा समझते और अपराधी को पकड़ने की रणनीति तैयार करते थे। मृदु व्यवहार के चलते बीपी जोगदंड जनता के काफी नजदीक थे और कई बार थानेदार से पहले उन्हें अपराधी की जानकारी हो जाती थी।

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UP Police
बीपी जोगदंड ने अपने दफ्तर में पीड़ितों की भीड़ देखते ही जान लिया कि थानों पर सुनवाई न होने से लोग भटक रहे हैं। उन थानों को चिह्नित किया, जहां से आने वाले पीड़ितों की संख्या अधिक थी। सिर्फ चार-पांच थानेदारों पर गाज गिरते ही पूरे जिले की व्यवस्था दुरुस्त हो गई। 
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- फोटो : डेमो
थानों में सुनवाई शुरू होते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक व क्षेत्राधिकारियों के कार्यालय के चक्कर काटने वाले पीड़ितों की संख्या घटने लगी। इसके बाद उन्हें क्षेत्राधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षकों से थानों का गहन पर्यवेक्षण शुरू कराया। 
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