बेअंदाज थानेदारों को डांट-फटकार के बजाय मुस्कराकर शासन की मंशा समझाई और चंद दिनों में ही सब अनुशासित नजर आने लगे। संगीन वारदात पर विचलित होकर मातहतों को फटकारने के बजाय वह खुद मौके पर जाकर माजरा समझते और अपराधी को पकड़ने की रणनीति तैयार करते थे। मृदु व्यवहार के चलते बीपी जोगदंड जनता के काफी नजदीक थे और कई बार थानेदार से पहले उन्हें अपराधी की जानकारी हो जाती थी।