बात 1974 की है। नारायण दत्त तिवारी प्रदेश में वित्त सहित कई विभागों के मंत्री थे। एक दिन काशीपुर (नैनीताल) से पत्रकार व साहित्यकार इंद्रवर्मा चौहान उनसे मिलने आए थे। तिवारी जी काफी व्यस्त थे। इस कारण उन्होंने वर्मा से शाम को मिलने का आग्रह किया।
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संयोग से उस दिन तत्कालीन केंद्र सरकार मंत्री केसी पंत भी लखनऊ आए थे। वर्मा ने अपने संस्मरण में लिखा है, ‘शाम 7 बजे तिवारी जी मुझे साथ लेकर विधानभवन से बाहर निकले गाड़ी में बैठकर राजभवन की तरफ चल दिए। पंत जी वहीं ठहरे थे। विधानभवन से राजभवन दो-तीन मिनट में पहुंच गए। इसलिए पूरी बात हो ही नहीं पाई।
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- फोटो : डेमो
मुझे अतिथि कक्ष में बैठाकर तिवारी जी पंत जी से मिलने अंदर चले गए। वहां से लगभग शाम 7.50 पर बाहर निकले और मुझे साथ ले महानगर स्थित अपने आवास की तरफ चल दिए। हजरतगंज से आगे अशोक मार्ग पर एक जगह ड्राइवर से बोले, ‘भाई! जरा कहीं रोकना। दाढ़ी बनवा लूं। थोड़ी देर में जापान के प्रतिनिधि मंडल से भी मिलना है।’
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ड्राइवर ने एक जगह नाई की दुकान देखकर गाड़ी रोक दी। तिवारी जी दुकान पर चढ़ गए। आठ बजने में एक मिनट शेष था। नाई ने कहा ‘क्षमा करिएगा, आठ बजने वाला है। दुकान बंद करने का समय हो गया है। आप की दाढ़ी बनाऊंगा तो चालान हो जाएगा।’
तिवारी जी ने हंसते हुए उसकी पीठ थपथपाई और दुकान से उतरे और गाड़ी में बैठकर आगे लिए चल दिए। मैंने पूछा तो बोले, ‘नाई ने तो नियमों का पालन किया है। उसकी सराहना होनी चाहिए। अगर सरकार के मंत्री ही नियमों का पालन नहीं करेंगे तो जनता में क्या संदेश जाएगा।'