यूपी के मुख्यमंत्री रहे चंद्रभानु गुप्त निजी जीवन में काफी कंजूस थे, पर मदद मांगने आने वाले पर पहले तो भड़क जाते। पर, जब वह निराश होकर लौटने लगता तो खाली हाथ नहीं जाने देते। फिरोज गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़े और डॉ. राममनोहर लोहिया के लंबे समय तक निजी सचिव रहे नंद किशोर के साथ भी एक बार ऐसा ही हुआ।
उनकी बेटी की शादी तय हो गई थी, पर उनके सामने पैसे की बड़ी समस्या थी। मित्रों ने मदद की, लेकिन तब भी वह धन कम ही रह गया। नंद किशोर ने अपने संस्मरण में लिखा है, ‘मैं गुप्त जी के पास गया और 5000 रुपये मांगे। वह भड़क गए और बोले, ‘क्या मैं कुबेर हूं, जो देखो वह चला आता है।
मेरे पास कुछ भी नहीं है।’ मैं भी उन्हें बड़बड़ाता हुआ लौट आया। दुखी और निराश होकर कॉफी हाउस में बैठ गया। लगभग दो घंटा हो गए। तभी प्रकाश मेहरोत्रा जो बाद में राज्यसभा सदस्य और असम के राज्यपाल भी बने वह कॉफी हाउस के अंदर आते दिखे।