फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सावन के महीने में इस मंदिर में मांगने से पहले ही बाबा पूरी कर देते हैं मुराद

Tue, 18 Jul 2017 04:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 6
कल्याणग‌िर‌ि मंद‌िर
नवाब आसिफुद्दौला के जमाने में स्थापित लखनऊ के प्राचीन कल्याण गिरि मंदिर की दूर-दूर तक ख्याति है। बाबा की महिमा इस कदर है कि यहां भक्तों को मनौतियां नहीं मांगनी पड़ती, बाबा खुद-ब-खुद उनकी मुराद पूरी कर देते हैं। खासकर सावन के महीने में इस मंद‌िर में पूजा का खास महत्व है।
विज्ञापन

2 of 6
कल्याणग‌िर‌ि मंद‌िर
बताते हैं कि नवाबी दौर में हरिद्वार से एक साधु कल्याण गिरि यहां आए और गोमती के किनारे आसन लगा लिया। एक अमरख के पेड़ के नीचे उन्होंने महादेव की प्रतिमा स्थापित की और उनकी पूजा-अर्चना कर पेड़ की खट्टी अमरख ग्रामीणों में बांट दी, लेकिन ये आम सी मीठी हो गई। 
विज्ञापन

3 of 6
कल्याणग‌िर‌ि मंद‌िर
इसके बाद बाबा का नाम दूर-दूर तक फैल गया। चर्चा जब नवाब तक पहुंची तो वहां से भी लोगों का आना शुरू हो गया। नवाब की तरफ से उनका मान-सम्मान करते हुए उन्हें विराजने के लिए नदी के किनारे उसी टीले के आसपास की तमाम जगह दे दी गई। 

4 of 6
कल्याणग‌िर‌ि मंद‌िर
कालांतर में यही मंदिर पुराने लखनऊ में ठाकुरगंज कल्याण गिरि के नाम से संवरा। आज यहां अखाड़ा परंपरा के तहत पुजारी और महंत नियुक्त होते हैं। 
विज्ञापन

5 of 6
कल्याणग‌िर‌ि मंद‌िर
वर्तमान में मंदिर की देखभाल महंत बाबा सुमेरु गिरि करते हैं। गुजरात के गिरनार पर्वत के महंतों का बराबर यहां आना-जाना लगा रहता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
कल्याणग‌िर‌ि मंद‌िर
मंदिर का निर्माण दक्षिण भारत के मंदिरों की तर्ज पर आज भी जारी है। महाशिवरात्रि पर नगर की सबसे भव्य शिव बारात निकलती है, जो करीब डेढ़ से दो किमी. लंबी होती है। सावन के दौरान हर सोमवार को दिनभर रुद्राभिषेक व शृंगार के दौर चलते हैं। बाबा का मुख्य अरघा रजत आच्छादित है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें