जानिए कैसे होता है भिखारियों का प्रशिक्षण
भिखारियों का प्रशिक्षण कैसे होता है, इस सवाल को लेकर हम दुबग्गा पहुंचे। शरीर से हट्टा-कट्टा मकरंद साधु वेश में भीख मांग रहा था। जैसे ही हमने कहा भीख मांगते शर्म नहीं आती उसने तपाक से कहा फिर और क्या करें? काम करोगे?...ये सवाल सुनते ही वह बोल पड़ा-हमारी तो पूरी जिंदगी ऐसे ही कट गई...अब क्या करेंगे। बच्चों की तो शर्म करो...ये वाक्य सुनते ही वह कुछ ढीला पड़ा। बोल पड़ा-साहब क्या करें? फिर हमें हिकारत भरी नजरों से देखते हुए बोल पड़ा-बाबूजी आसान नहीं भीख मांगना। ऐसे किसी से मांगों तो कोई देगा...। नहीं...ना। बच्चे अच्छा कमा लेते हैं। पर, बच्चे बड़ों को पैसा देने पर मजबूर कर दें, इसके लिए उन्हें तैयार करना पड़ता है।
बड़ा कठिन होता है ये सब। कुछ बच्चे काम जल्दी समझ जाते हैं। पर, एक महीना तो लग ही जाता है उन्हें सबकुछ सिखाने में। सुबह जल्दी उठना है, बाल बिखरा और गंदा रखना है ये सब सिखाया जाता है। बच्चे जिद करते हैं। पर, धीरे-धीरे सब सीख जाते हैं। बाबूजी, भूख लगी है... भैया कुछ पैसा दे दो ... जैसी लाइनें रटाई जाती हैं। फिर ऐसा बोलते समय वह एकदम दीन-हीन नजर आए उसकी ट्रेनिंग दी जाती है।