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Special Story: आत्मविश्वास से भरे युवा बोले- विवाद वहां होते हैं जहां गलतफहमियां होती हैं

Sun, 12 Jan 2020 04:58 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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हाथों में लकीरों को बनाकर चले हैं हम
कंधों पर आसमान को उठाकर चले हैं हम।
कह दें जाकर घनी रातों के तमस से
सूरज हथेलियों पर उगाकर चले हैं हम।

ऐसे ही आत्मविश्वास से लबरेज हैं राजधानी के युवाओं के इरादे। ये अब सिर्फ आने वाले कल की ही तस्वीर नहीं, बल्कि ये हमारा आज भी हैं। पूर्वाग्रहों में जी रहे लोगों को लगता है कि युवा दिशाहीन हो रहे हैं, पर ऐसा नहीं। इनका नजरिया बहुत ज्यादा स्पष्ट है। इन्हें अपनी प्राथमिकताएं मालूम हैं। बगैर सोचे-समझे ये कोई कदम नहीं उठाते। गलतफहमियों में जीते नहीं और भेड़चाल इन्हें पसंद नहीं। बीते दिनों जो कुछ भी देश में हुआ इनकी नजर हर घटनाक्रम पर रही, लेकिन इनका धैर्य, इनकी समझ बरकरार है। परिवार के साथ-साथ ये समाज, देश अपने कॅरिअर और सामाजिक जिम्मेदारियों से बखूबी परिचित हैं। राष्ट्रीय युवा दिवस पर आइए सुनते हैं इन युवाओं के मन की धुन...।
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एक्सपेरिमेंट हमें स्वीकार
लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ प्रोफेशन स्टडीज के स्टूडेंट नैमिष, मृदुल व उनके दोस्त कहते हैं कि हमें प्रयोगों में यकीन है। हमें लीक से हटकर कुछ करना है। देश-दुनिया देखने की हमें चाह है, अपने पैशन को लेकर संजीदा हैं, जो नकारात्मकता युवाओं को लेकर है वो चंद लोगों में हैं। हम हर मुद्दे पर बात करते हैं, हम तटस्थ हैं। (नैमिष, मृदुल, नजम, अमिताभ, कशिश, अंकित, इशिता)
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हम दिग्भ्रमित नहीं
नेशनल पीजी कॉलेज के स्टूडेंट प्रणय उत्कर्ष और उनके दोस्त कहते हैं कि लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि यहां अपनी बात रखने की आजादी है। कई बार ऐसा होता है कि चंद लोग अपने फायदे के लिए युवाओं का इस्तेमाल करते हैं, जो इस्तेमाल होते हैं उनकी संख्या कम है। हम युवा दिग्भ्रमित नहीं हैं। हमारा घर, समाज, देश हमारी प्राथमिकता है। सबसे बढ़कर है पढ़ाई, क्योंकि पढ़-लिख कर ही हम खुद को देश के काम आने लायक बना सकेंगे। (प्रणय मिश्रा, उत्कर्ष, साक्षी, सेजल, अनस, शांतनु, शुभम, हर्षित, सचिन)

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हम जानते हैं सही-गलत में फर्क
लखनऊ विश्वविद्यालय के बीए तृतीय वर्ष के छात्र अजिता व उनके दोस्त कहते हैं कि बदलाव हम युवा ही लाएंगे। हर युवा का देश की तरक्की में योगदान है। बीते एक महीने से देश में जो कुछ हो रहा है उससे व्यक्तिगत रूप से तो हम प्रभावित कतई नहीं हैं। हां, जो कुछ भी बीते दिनों शुरू हुआ तो मेरा कहना है कि गलत होने पर ही सही चेहरे सामने आते हैं। हम लोग सही-गलत का फर्क जानते हैं। (अजिता, सत्यम, मो.दरवेश, शुभांगी, हर्षिता।)
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हमें अहसास है अपनी जिम्मेदारियों का
एमिटी यूनिवर्सिटी के एलएलबी स्टूडेंट अंजलि, सोनाली, आशीष व उनके दोस्त कहते हैं कि प्रैक्टिकल और रीयल लाइफ का अंतर समझना जरूरी है। हम कोई भी कदम तब तक नहीं उठाते जब तक कि हम उसको गहराई से समझ नहीं लेते हैं। कानून के छात्र होने के नाते हमें अपनी जिम्मेदारियों का अहसास है। देश-समाज के हालात पर हमारी नजर रहती है। (अंजलि, आशीष, कौशिक, गौरव, सोनाली, पल्लवी व अन्य।)
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भीड़ के साथ चलने की हमारी आदत नहीं
आईटी लखनऊ के थर्ड ईयर के स्टूडेंट अंकुर और उनके दोस्त कहते हैं कि हमने अपनी राह अलग बनाई है। हमें भीड़ के साथ चलने में यकीन नहीं। हमारी परीक्षा चल रही और बीते दिनों हम इसी की तैयारी में व्यस्त रहे। दरअसल हम मानते हैं कि विवाद वहां होते हैं, जहां गलतफहमियां होती हैं। पहले हम चीजों को समझते हैं, तब एक्शन लेने में यकीन रखते हैं। (अंकुर, पुष्पेंद्र, जयेंद्र, कौस्तुभ, अतुल, क्षितिज, कुंवर गौरव।)
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