दुबली पतली काया, हाथों में लाठी, एक धोती... फिर भी व्यक्तित्व ऐसा करिश्माई की साल-दर-साल उसका असर बढ़ता ही जा रहा है। एक दौर से दूसरे दौर तक का सफर तय करने के क्रम में उस व्यक्तित्व और उसकी दी गई सीख की प्रासंगिकता और ज्यादा महत्वपूर्ण होती जा रही है। यह उत्साहवर्धक है कि नई पीढ़ी में महात्मा गांधी के प्रति सहज आकर्षण है और टिकाऊ है। तभी तो सामाजिक बदलाव की खातिर युवा उनके बताए रास्तों पर न केवल चल रहे हैं बल्कि लोगों को भी चलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे गर्व से दावा करते हैं कि उनमें कहीं गांधी जिंदा है। गांधी जयंती पर हमने बात की युवाओं से और जानने की कोशिश की कि वे कितना बापू को समझते हैं और कितना अपनाया है उनको अपने जीवन में, पेश एक रिपोर्ट...।
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रमेश कुमार
- फोटो : अमर उजाला
एक यूटोपियन जिंदा सा लगता है
- रमेश कुमार, शोधार्थी, बीबीएयू
महिला सशक्तीकरण के दावों के बीच लगातार बढ़ती दुष्कर्म की घटनाएं, भ्रष्टाचार गांधी के प्रतीकात्मक राम राज्य की परिकल्पना की जरूरत को बता रहे हैं। उनका जोर स्व अनुशासन, नैतिक बल, मानवता के साथ विज्ञान और शिक्षा में नैतिकता पर रहा है। सबसे बड़ी बात जो उन्होंने कही थी कि पहले खुद अपनाओ और फिर लागू करो। नई शिक्षा नीति को जिस तरह से अनुभवों पर आधारित बनाया गया है, वो गांधी की प्रासंगिकता ही तो हैं।
इसे अपनाने की कोशिश : मैं गांधी को हर कदम पर एक आदर्श के रूप में पाता हूं। कदम-कदम पर उनकी सोच की जरूरत महसूस करता हूं। उनके जैसा एक यूटोपियन अपने भीतर जिंदा पाता हूं।
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सैय्यद मेहंदी मोमिन
- फोटो : अमर उजाला
उनका ड्रोन चरित्र अपनाने की जरूरत
- सैय्यद मेहंदी मोमिन, सांख्यिकी छात्र, लविवि
मैं बात करना चाहता हूं कि गांधी आखिर गांधी बने कैसे, किन कारणों से वे युवाओं के दिलो-दिमाग में जिंदा हैं। गांधीजी की किताब एक्सपेरीमेंट विद ट्रुथ में उन्होंने अपनी झिझक के बारे में लिखा है। इस किताब में ड्रोन की क्षमता को साइलेंट ऑब्जर्वर की तरह बताया है। साथ ही गांधीजी की तुलना उस ड्रोन से की गई जो महसूस करता है, समझता है पर सार्वजनिक जीवन में बोल नहीं पाते थे। एक दिन ऐसा हुआ कि अपनी इस कमजोरी को ताकत बनाया और स्वाधीनता के अग्रदूत बने। इसे अपनाने की कोशिश : गांधीजी का कहना था कि युवा शक्ति भी ठीक इसी तरह से है, बस उसे सही प्लेटफॉर्म की जरूरत है। मैंने खुद को इस बारे में ऐसा ही महसूस किया है।
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अदिति कुमारी
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कोरोना काल ने साबित की उनकी प्रासंगिकता - अदिति कुमारी, शोध छात्रा
गांधीजी का पूरा जीवन ही एक आदर्श है। जहां से चाहो, वहां से कुछ अपना लो। सबसे पहली बात कि सच की जीत तय है। सच बोलकर आप खुद को आजाद महसूस करते हैं, जबकि एक झूठ के लिए न जाने कितने आधार ढूंढने पड़ते हैं। खुद करके दूसरों के सामने आदर्श प्रस्तुत करो। अब देखिए न माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे मोबाइल फोन का इस्तेमाल छोड़ दें। यहां हमें महात्मा के आदर्शों को लागू करना चाहिए। इसी तरह कोरोना काल में आत्मनिर्भरता, साफ-सफाई और इम्युनिटी की बात की जा रही है, ये तो गांधीजी ने वर्षों पहले कह दिया था। इसे अपनाने की कोशिश: सत्यवादी नहीं कहूंगी खुद को, लेकिन सच के रास्ते पर चलने की कोशिश करती हूं।
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अंशिका सिंह
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एक जिद का महत्व समझाया
- अंशिका सिंह, पीजी स्टूडेंट
हाल ही मैंने गांधीजी को जानना, समझना शुरू किया है। माई एक्सपेरीमेंट विद ट्रुथ पढ़ने के दौरान उनके स्वभाव से जिद का महत्व थोड़ा-थोड़ा समझ में आया। उनके चरित्र ने सिखाया की जो पसंद नहीं उसे ना कहना सीखिए। नॉनवेज या अंडा खाना इसलिए जरूरी नहीं कि लोग कह रहे हैं और यदि एक बार खा लिया तो खाना ही है। नहीं पसंद तो छोड़ दीजिए। इसी तरह से जीवन में छोटी-बड़ी बातों को हमें अपनाना चाहिए। युवाओं में भी इसी तरह की जिद और ना कहने की क्षमता जरूरी है। ये अपनाने की कोशिश: अंत:करण को मजबूत बनाना जरूरी है, इससे व्यक्ति के व्यक्तित्व में करिश्माई गुण आते हैं। इसे अपनाने की कोशिश कर रही हूं।
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम
- दुर्गेश त्रिपाठी, पूर्व अध्यक्ष, छात्र परिषद, लविवि व चांसलर मेडल विजेता
दरअसल, बापू की सोच पर आगे बढ़ते हुए ही मैं यहां तक पहुंचा हूं। गांधीजी ने ग्राम स्वराज की अवधारणा दी थी। हम उसी पर चलकर एकल अभियान से जुड़े। गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित एकल अभियान के तहत मैं उन युवाओं का नेतृत्व कर रहा हूं, जो गांव में शिक्षा की गुणवत्ता पर काम करते हैं। इसके अलावा गांधीजी ने महिला सशक्तीकरण की बात कही थी, इसलिए उन्हें स्वरोजगार के उद्देश्य से आर्ट एंड क्राफ्ट का प्रशिक्षण दिलवा कर आत्मनिर्भर बनाने पर काम कर रहा हूं। वर्तमान परिदृश्य में सेल्फ डिफेंस जरूरी है और हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसे अपनाने की कोशिश: उनकी सोच थी कि बिना शोर-शराबा किए, साधारण तरीके से समाज से जो कुछ मिला है, उसे ज्यादा बेहतर रूप में उसे लौटाना है। विनम्र बने रहने के लिए उनकी सीख हौसला देती है। मेरी यही कोशिश है।