सुमन रावत
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व्हीलचेयर कमजोरी नहीं मेरी ताकत है
मेरा नाम सुमन रावत है। तीन चार साल की थी, तब बुखारा आया और पैर में उतर गया। मैं चलने-फिर में असमर्थ हुई और विशेष बच्चों में गिनी जाने लगी। मेरा शिक्षा भी ऐसे ही स्कूल में हुई। कक्षा सात में थी तो किसी ने कैंप में जाने की सलाह दी, मेरा दुर्भाग्य था कि ठीक होने के बजाय और लाचार हो गई। जिस नस में इंजेक्शन लगाना था, डॉक्टर ने दूसरी नस में लगा दिया। मेरे पापा आज भी ठेला लगाते हैं, दूर पढ़ाई करने भेजना संभव नहीं था। पढ़ाई छूटी घर बैठ गई, पर मेरी लगन सच्ची थी, मुझे मदद मिल गई और पढ़ाई शुरू हो गई।
आज मैं बीएड कर रही हूं। स्कूल में मैंने खेल के बारे में बस यूं ही एक दिन शुरुआत हो गई, मैंने जेवलिन डिस्कस आउटपुट खेलना शुरू किया, साधन थे नहीं तो ईंटे से प्रैक्टिस करती थी। स्टेट लेवल तक सफलता मिली, मुझे बताया गया कि भाला फेंकने से मेरी रीढ़ की हड्डी पर असर आ सकता है, क्योंकि पैर में दिक्कत पहले से थी। वह खेल बंद कर दिया। यहां फिर मुझे मार्गदर्शन मिला और मैं बैडमिंटन की प्रैक्टिस करने लगी। बनारस खेलने गई थी, वहीं मुझे बताया गया कि व्हील चेयर पर बैठकर बैडमिंटन खेला जाता है। एक नई राह मिल गई। व्हीलचेयर पर दसों बार गिरी, फिर इतनी अभ्यस्त हो गई कि तीन बार नेशनल खेला और तीनों बार सिल्वर, ब्रांज और गोल्ड मेडल जीत चुकी हूं। 2020 में कोरोना के कारण सफर थमा है, जो फिर से शुरू होगा। सपना इंटरनेशनल खेलने का है, कोशिश जारी है।