प्रो. वीरेंद्र वर्मा, ईएनटी विभाग केजीएमयू
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आमतौर पर बरसात का मौसम कानों के लिए खराब होता है। कान के बाहरी भाग में बैक्टीरिया और फफूंदी या फंगल बढ़ जाते हैं। इसी तरह कान की पुरानी बीमारियां, जो दबी होती हैं, इस मौसम में उभर आती हैं। नहाते समय, बारिश में भीगते समय या तैराकी करते समय कई बार पानी अंदर चला जाता है। यह वह मौसम होता है जब जुकाम या गला खराब होने जैसी दिक्कतें बढ़ती हैं, इसका असर कानों पर पड़ता है। खासकर तब जब वायरल दो-चार दिन से अधिक रुक जाए।