लखनऊ मेट्रो का ट्रायल रन धूमधाम से हो चुका। बस कुछ महीनों के बाद इसका कॉमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। जानें मेट्रो की खासियत।
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लखनऊ मेट्रो
- फोटो : amar ujala
लखनऊ की मेट्रो बिना शोरगुल के लोगों को सुखद सवारी कराएगी। ध्वनि प्रदूषण के अधिकतम मानक 45 डेसीबल से भी कम शोरगुल मेट्रो ट्रेन के चलने की वजह से होगा।
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ट्रेन के संचालन के समय यात्री सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा। इसके लिए उनकी सुरक्षा के लिए सीसीटीवी और दिव्यांग यात्रियों को व्हीलचेयर खड़ी करने के लिए विशेष जगह बनाई गई है।फ्रांस की कंपनी अलस्टॉम के बनाई ट्रेन में चार कोच रखे गए हैं।
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इनमें से दो कोच ड्राइवर केबिन के साथ और बीच के दो कोच मोटर के साथ रखे गए हैं। एयर कंडीशन सिस्टम सहित सभी भारी उपकरणों को ट्रेन के नीचे लगाया गया है। इससे ट्रेन में यात्रियों के लिए अधिकतम जगह बनाने में मदद मिली है।
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एक बार में 1100 यात्री इसमें आ सकेंगे। इसमें से 330 के बैठने की जगह स्टील की बाल्टीनुमा बनी सीटों पर होगी। सीटों की खास डिजाइन की वजह से यात्रियों को बैठने में सुविधा होगी।
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ट्रेन का संचालन मानव रहित किया जा सकता है। इसके लिए ट्रेन का निर्माण कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) तकनीक से किया गया है। यह ट्रेन स्टेंडर्ड गेज 1.435 मीटर चौड़ाई केट्रैक पर संचालित होती है। वहीं ट्रेन के कोच की चौड़ाई 2.9 मीटर रखी गई है। इससे यात्रियों को आने-जाने के लिए ज्यादा जगह मिल पाती है।
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वहीं ट्रेन के दरवाजों की चौड़ाई भी 1.5 मीटर रखी गई है। इससे चढ़ने और उतरने में दिक्कत नहीं होगी। ट्रेन का संचालन 25केवी से चार्ज हुई ओएचई लाइन की बिजली से होगा। वहीं ट्रेन का संचालन बंद नहीं हो। इसकेलिए एक बैकअप पॉवर सप्लाई का इंतजाम भी रहेगा।
पब्लिक इंफॉर्मेशन सिस्टम में एलसीडी का उपयोग किया गया है। इससे लोगों को ज्यादा साफ शब्दों में अगले स्टेशन और दरवाजे खुलने की सूचना दी जा सकेगी। टॉक बैक फीचर से ट्रेन ऑपरेटर या कंट्रोल सेंटर में सीधे बात करना यात्री के लिए इमरजेंसी के समय संभव होगा।