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तेजस के कारण शताब्दी एक्सप्रेस का बुरा हाल, बेस फेयर पर भी नहीं मिल रहे यात्री, मुंह मोड़ रहे लोग

Tue, 02 Mar 2021 12:34 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस का इतिहास गौरवमयी रहा है। इसने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। दूसरी सबसे तेज दौड़ने वाली ये शताब्दी आईएसओ प्रमाणित भी है। देश में पहली बार एलएचबी बोगियों का ट्रायल भी शताब्दी एक्सप्रेस में ही हुआ है। पर, तेजस एक्सप्रेस को सफल बनाने के लिए अब शताब्दी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते ही यात्री शताब्दी से मुंह मोड़ने लगे हैं।
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- फोटो : amar ujala
नवंबर 1988 में तत्कालीन रेलमंत्री माधवराव सिंधिया के कार्यकाल में शताब्दी एक्सप्रेस चलाने का खाका तैयार किया गया। योजना थी कि मेट्रो सिटी को शताब्दी से जोड़ा जाए। खाका जमीन पर उतारा गया। देशभर में 24 जोड़ी से अधिक शताब्दी अब तक पटरी पर उतर चुकी हैं। इसमें लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस (02003/04) पहले कानपुर व नई दिल्ली के बीच चलती थी। पर, जब 1993 में आमान परिवर्तन (गेज कन्वर्जन) हुआ तो ट्रेन का दायरा बढ़ाकर यूपी की राजधानी लखनऊ तक कर दिया गया।
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- फोटो : amar ujala
रेलवे विशेषज्ञ एसके शर्मा ने बताया कि साल 2001 के आसपास यह ट्रेन लखनऊ मंडल को मिली। पहले इसका संचालन उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के पास था, लेकिन इसे नई दिल्ली से चारबाग लाने और फिर उसे वापस रवाना करने में दिक्कतें होती थीं। शताब्दी एक्सप्रेस लखनऊ मंडल की शान रही है। इस ट्रेन की एक-एक सीट के लिए मारामारी होती थी। चूंकि, पूरी ट्रेन चेयरकार है, इसलिए यात्री दिन के दिन दिल्ली पहुंच जाते हैं, लेकिन स्थिति अब यह हो गई है कि शताब्दी में सुविधाएं घटा दी गई हैं और किराया महंगा कर दिया गया है। इसलिए यात्री कतरा रहे हैं। पहले ट्रेन के किराए में खानपान शामिल था, अब अलग से पैसा देना पड़ता है। यही नहीं, डायनेमिक फेयर की वजह से किराया भी काफी बढ़ जाता है, जो यात्रियों को रास नहीं आता।

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...और जंक्शन पर शिफ्ट हो गई शताब्दी
शताब्दी एक्सप्रेस पहले चारबाग रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली के बीच चलती थी। लेकिन बाद में इसे एक योजना के अंतर्गत लखनऊ जंक्शन पर शिफ्ट कर दिया गया। लखनऊ से चलने व टर्मिनेट होने वाली गाड़ियों को जंक्शन पर शिफ्ट करने का खाका बनाया गया, जिसके बाद से यह जंक्शन से चल रही है। पहले इसमें परंपरागत कोच लगते थे।
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- फोटो : PTI
दूसरी सबसे तेज शताब्दी
लखनऊ जंक्शन नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस देशभर में दौड़ रही शताब्दी में रफ्तार के मामले में दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस है। जो 155 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती है। जबकि अपनी शताब्दी एक्सप्रेस 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। यही वजह है कि लखनऊ से दिल्ली महज 6.45 घंटे में यात्रियों को पहुंचा देती है। जबकि लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस दिल्ली पहुंचने में सवा छह घंटे ही लेती है। तुलनात्मक रूप से देखें तो समय में ज्यादा अंतर नहीं है। पर, रेलवे अधिकारियों की लापरवाही के चलते मंडल की शान रही शताब्दी एक्सप्रेस बदहाल होती जा रही है।
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- फोटो : अमर उजाला
बेस फेयर पर भी नहीं मिल रहे यात्री
शताब्दी में बेस फेयर पर भी पैसेंजर टिकट बुक नहीं करवा रहे हैं। शताब्दी की चेयरकार में अगले पंद्रह दिन तक खाली सीटों का औसतन किराया 820 रुपये है, जिसमें बेस फेयर 695 रुपये शामिल है। जबकि एग्जीक्यूटिव का किराया 1770 रुपये है, जिसमें बेस फेयर 1550 है। वहीं, तेजस की चेयरकार का किराया 1188 रुपये, जिसमें बेस फेयर 870 रुपये तथा एग्जीक्यूटिव क्लास का 1827 रुपये है, जिसमें बेस फेयर 1740 रुपये शामिल है।
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