रेलवे विशेषज्ञ एसके शर्मा ने बताया कि साल 2001 के आसपास यह ट्रेन लखनऊ मंडल को मिली। पहले इसका संचालन उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के पास था, लेकिन इसे नई दिल्ली से चारबाग लाने और फिर उसे वापस रवाना करने में दिक्कतें होती थीं। शताब्दी एक्सप्रेस लखनऊ मंडल की शान रही है। इस ट्रेन की एक-एक सीट के लिए मारामारी होती थी। चूंकि, पूरी ट्रेन चेयरकार है, इसलिए यात्री दिन के दिन दिल्ली पहुंच जाते हैं, लेकिन स्थिति अब यह हो गई है कि शताब्दी में सुविधाएं घटा दी गई हैं और किराया महंगा कर दिया गया है। इसलिए यात्री कतरा रहे हैं। पहले ट्रेन के किराए में खानपान शामिल था, अब अलग से पैसा देना पड़ता है। यही नहीं, डायनेमिक फेयर की वजह से किराया भी काफी बढ़ जाता है, जो यात्रियों को रास नहीं आता।