लखनऊ शहर को नजाकत, नफासत और खुशमिजाजी विरासत में मिली है। रवायतों का चलन और अदब की महफिलें यहां बदस्तूर गुलजार हैं। इन्हीं रंगों को देखिए हमारे फोटो जर्नलिस्ट अर्जुन साहू के कैमरे की नजर से।
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- फोटो : amar ujala
अवध के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जंग से ठीक पहले कैसरबाग में खूबसूरत इमारतें बनवाई थीं। तब के दौर में कैसरबाग एक बेहद खूबसूरत इलाका हुआ करता था। लखनऊ के इसी मोहल्ले को हेरीटेज पर्यटन और स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए चुना गया है। इसके तहत यहां की पुरानी ठसक को आधुनिकता का जामा पहनाया गया है।
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शाम ढलने के साथ ही जब जीपीओ, विधानभवन और लोकभवन रंग-बिरंगी लाइटिंग से रोशन होते हैं तो यहां का नजारा ऐसा लगता है, मानो लखनऊ खुद को आईने में देख रहा हो।
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लखनऊ का मतलब है जिंदादिली। यहां का अपना अलग ही मिजाज है। यहां जिंदगी का मतलब 24 गुणा 7 के गोल-गोल चक्कर में घूमना नहीं है बल्कि हर पल को अपने अंदाज में खुलकर जीना है। मस्त...। बेफिक्र...। हजरतगंज के ये खिलखिलाते चटख रंग यहां के मिजाज जैसे ही हैं।
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बदलता लखनऊ...। आगे बढ़ता लखनऊ...। वाकई लखनऊ बहुत बदल गया है। तरक्की की राह पर इस शहर की रफ्तार बहुत तेज है। वक्त तेजी से बदला और इक्का, टांगा की सवारी टैंपो-ऑटो रिक्शा से होते हुए मेट्रो तक पहुंच गई है।
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लखनऊ की शान यहां की ऐतिहासिक इमारतें रही हैं। लेकिन अब पुराने लखनऊ से अलग नए लखनऊ में मॉडर्न शहरों की तर्ज पर विकास हुआ है। फिर चाहे रिवर फ्रंट हो या फिर गोमतीनगर के पार्क।